सावधान! क्या आपका कुत्ता भी आपको चाटता है? इस महिला के साथ जो हुआ वह आपकी रूह कंपा देगा

एक चौंकाने वाली घटना में पालतू कुत्ते की लार से महिला को घातक सेप्सिस संक्रमण हो गया। जानें यह बैक्टीरिया कैसे फैलता है और बचाव के उपाय क्या हैं।
 
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​आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पालतू जानवर (Pets) हमारे मानसिक तनाव को कम करने और घर में खुशियां लाने का जरिया होते हैं। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि आपके वफादार कुत्ते का प्यार भरा व्यवहार आपकी जान का दुश्मन बन सकता है? हाल ही में सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना में, एक महिला को अपने पालतू कुत्ते द्वारा चाटे जाने के मात्र 24 घंटे के भीतर अपने दोनों हाथ और पैर गंवाने पड़े।

​डॉक्टरों ने इसे सेप्सिस (Sepsis) और एक दुर्लभ बैक्टीरिया का संक्रमण बताया है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि आखिर एक 'चाट' इतनी घातक कैसे हो सकती है।

​घटना का विवरण: 24 घंटे में बदली जिंदगी

​रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला बिल्कुल स्वस्थ थी और उसे कोई पुरानी बीमारी नहीं थी। एक दिन उसे हल्का बुखार और कंपकंपी महसूस हुई। शुरुआत में इसे सामान्य फ्लू समझा गया, लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी स्थिति बिगड़ने लगी। शरीर पर नीले और लाल रंग के निशान (Rashes) उभरने लगे और अंग सुन्न होने लगे।

​जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने पाया कि उसका शरीर सेप्टिक शॉक (Septic Shock) में जा चुका था। संक्रमण इतनी तेजी से फैला कि अंगों को बचाने का समय ही नहीं मिला। महिला की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को मजबूरन उसके दोनों हाथ और दोनों पैर काटने पड़े।

​इस संक्रमण का असली गुनहगार: Capnocytophaga Canimorsus

​डॉक्टरों के अनुसार, इस संक्रमण का मुख्य कारण Capnocytophaga canimorsus नाम का बैक्टीरिया है।

​कहां पाया जाता है? यह बैक्टीरिया कुत्तों और बिल्लियों के मुंह (लार) में सामान्य रूप से पाया जाता है। जानवरों के लिए यह हानिकारक नहीं होता।

​इंसानों में कैसे फैलता है? यह बैक्टीरिया लार के जरिए इंसानी खून में तब प्रवेश करता है जब कुत्ता किसी घाव, खरोंच या श्लेष्म झिल्ली (जैसे आंख, नाक या मुंह) को चाटता है।

​खतरा किसे है? हालांकि यह स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उनमें यह तेजी से 'सेप्सिस' पैदा करता है।

​सेप्सिस (Sepsis) क्या है और यह क्यों घातक है?

​सेप्सिस कोई बीमारी नहीं, बल्कि संक्रमण के प्रति शरीर की एक अति-प्रतिक्रिया (Extreme Reaction) है। जब हमारे शरीर में कोई संक्रमण होता है, तो इम्यून सिस्टम उससे लड़ता है। लेकिन सेप्सिस की स्थिति में, इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ने के बजाय खुद के ही अंगों और ऊतकों (Tissues) को नुकसान पहुँचाने लगता है।

​सेप्सिस के चरण:

​संक्रमण: बैक्टीरिया खून में पहुंचता है।

​अंगों की विफलता: रक्तचाप (Blood Pressure) गिर जाता है और अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती।

​टिश्यू डैमेज: ऑक्सीजन की कमी से हाथ-पैर की कोशिकाएं मरने लगती हैं (Gangrene), जिसके कारण उन्हें काटना पड़ता है।

​बचाव के उपाय: घबराएं नहीं, सतर्क रहें

​इस खबर का मतलब यह नहीं है कि आप अपने पालतू जानवरों से दूरी बना लें। बल्कि, आपको कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है:

​घाव को बचाएं: अगर आपके शरीर पर कोई खुला घाव, कट या खरोंच है, तो उसे कुत्ते को चाटने न दें।

​साफ-सफाई: पालतू जानवर के साथ खेलने या उसे छूने के बाद अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।

​नियमित चेकअप: अपने पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण (Vaccination) और डेंटल चेकअप करवाएं।

​लक्षणों को न पहचानें: यदि पालतू जानवर के चाटने या काटने के बाद बुखार, सांस लेने में तकलीफ या त्वचा का रंग बदलने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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