MP मे ड्यूटी से गायब मिले 13 पटवारी-पंचायत सचिव वीडियो कॉल पर निलंबित: कलेक्टर की 'सख्त कार्रवाई' से सरकारी महकमे में हड़कंप

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष से अचानक किया 'लाइव लोकेशन' चेक; 8 पटवारी और 5 सचिव/जीआरएस गैर-हाज़िर, तत्काल निलंबन का आदेश
 
Collector

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ द्वारा की गई एक अप्रत्याशित और सख्त कार्रवाई से सरकारी महकमे में जबरदस्त खलबली मच गई है। कलेक्टर ने जनहित के कार्यों में लापरवाही और अपने मुख्यालय से अनुपस्थित रहने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए, ड्यूटी पर तैनात पटवारियों और पंचायत सचिवों/जीआरएस (ग्राम रोज़गार सहायक) की उपस्थिति की जाँच के लिए अचानक वीडियो कॉल का सहारा लिया। इस औचक निरीक्षण में, 13 कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यस्थल से गायब पाए गए, जिसके बाद कलेक्टर ने मौके पर ही उनके निलंबन का आदेश सुना दिया।

लापरवाही पर 'डिजिटल स्ट्राइक'

​यह कार्रवाई तब हुई जब कलेक्टर ने विभिन्न तहसीलों और जनपद पंचायतों के अधिकारियों को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष से वीडियो कॉल किया। यह कॉल विशेष रूप से पटवारियों और सचिवों के लिए निर्धारित किए गए जन-सुनवाई के समय, यानी सोमवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच, की गई थी। कलेक्टर ने पहले ही सख्त निर्देश जारी किए थे कि पटवारी प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को अनिवार्य रूप से पंचायत भवन में बैठकर जनता की समस्याओं का समाधान करें, जबकि पंचायत सचिवों को प्रतिदिन निर्धारित समय पर उपस्थित रहना था।

​कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कर्मचारियों से केवल बात नहीं की, बल्कि उन्हें अपने कार्यस्थल का बैकग्राउंड (पृष्ठभूमि) और लाइव लोकेशन दिखाने को कहा। कई कर्मचारियों ने बहाने बनाए, कुछ ने अस्पष्ट स्थानों से जवाब दिया, जबकि कुछ अपने घर पर पाए गए। एक कर्मचारी को तो वीडियो कॉल पर नहाए बिना, बिस्तर से उठा हुआ पाया गया। कलेक्टर ने सभी कर्मचारियों से पूछा कि जब पंचायत भवन में उपस्थित रहने का स्पष्ट निर्देश है, तो वे निर्धारित समय पर अपने मुख्यालय से बाहर क्यों हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर, उन्होंने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई के निर्देश दिए।

इन पर गिरी निलंबन की गाज

​जांच में विभिन्न विकासखंडों के 8 पटवारी और 5 पंचायत सचिव/जीआरएस अपने-अपने मुख्यालयों से अनुपस्थित पाए गए। कलेक्टर ने बिना किसी देरी के, जिला पंचायत सीईओ को इन सभी 13 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके विकासखंड मुख्यालय में अटैच करने का निर्देश दिया।

  • पटवारी (8): (कर्मचारियों के नाम उपलब्ध न होने पर इसे सामान्य रखा जा सकता है)
  • पंचायत सचिव/जीआरएस (5): (कर्मचारियों के नाम उपलब्ध न होने पर इसे सामान्य रखा जा सकता है)

​यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि प्रशासन अब सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहा है। कलेक्टर जांगिड़ ने इस बात पर जोर दिया है कि कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता से जुड़े काम समय पर और ठीक तरीके से हो सकें।

कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश

​इस सख्त कदम से उन सभी सरकारी कर्मचारियों को एक कड़ा संदेश गया है जो अपने कार्यस्थल पर उपस्थित रहने के बजाय मनमानी करते हैं। यह घटना बताती है कि शासन-प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और सरकारी योजनाओं व सेवाओं के सफल क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वालों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। इस कार्रवाई को जन-प्रतिनिधियों और आम जनता द्वारा सराहा जा रहा है, जो लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में पटवारियों और सचिवों की अनुपस्थिति से परेशान थे।

Tags