एमपी के 8 शहरों में जल्द दौड़ेंगी 972 इलेक्ट्रिक बसें: पीएम ई-बस सेवा को केंद्रीय मंजूरी
| नगर निगम |
आवंटित बसों की संख्या |
|---|---|
| इंदौर |
270 |
| भोपाल |
195 |
| जबलपुर |
200 |
| ग्वालियर |
100 |
| उज्जैन |
100 |
| सागर |
32 |
| देवास |
55 |
| सतना |
20 |
| कुल |
972 |
इंदौर को सबसे अधिक 270 बसें आवंटित की गई हैं, जो शहर में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
डिपो और चार्जिंग स्टेशन निर्माण पर जोर
ई-बसों का संचालन जल्द से जल्द शुरू हो सके, इसके लिए नगरीय निकायों द्वारा तैयारी तेजी से की जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सभी संबंधित निकायों को बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से जुड़े अधोसंरचना के सभी कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
बस डिपो: प्रत्येक शहर में ई-बसों के रखरखाव और पार्किंग के लिए आधुनिक बस डिपो का निर्माण किया जा रहा है।
चार्जिंग स्टेशन: बसों को चार्ज करने के लिए जरूरी चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इस बुनियादी ढांचे के निर्माण में लगभग 6 से 8 महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद बसों की टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू होगी।
पर्यावरण और यात्री सुविधा पर प्रभाव
इस पहल से शहरी परिवहन व्यवस्था में कई सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है:
प्रदूषण में कमी: इलेक्ट्रिक बसें शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) करती हैं। डीजल बसों की जगह इनके आने से शहर का प्रदूषण स्तर कम होगा और हवा की गुणवत्ता सुधरेगी।
सस्ती और आरामदायक यात्रा: ये बसें यात्रियों को किफायती, आरामदायक और स्वच्छ परिवहन सुविधा प्रदान करेंगी। इनकी संचालन लागत भी डीजल बसों के मुकाबले कम होती है।
आर्थिक विकास को बढ़ावा: सार्वजनिक परिवहन के बेहतर होने से लोगों का आवागमन आसान होगा, जिससे शहर की उत्पादकता और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
आधुनिक शहरीकरण: यह कदम मध्य प्रदेश के शहरों को आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार शहरी केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
समय-सीमा और अगली चुनौतियाँ
हालांकि मंजूरी मिल गई है, लेकिन इन बसों का संचालन शुरू होने में कुछ समय लगेगा। विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि बसों की खरीद और डिपो/चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण की प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग एक साल का समय लग सकता है।
टेंडर प्रक्रिया: बसों की खरीद के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर टेंडर जारी किए जाएंगे, जिसमें 6 से 8 महीने का समय लग सकता है।
बुनियादी ढाँचा: चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास एक बड़ी चुनौती है, जिसे समय पर पूरा करना आवश्यक होगा।
बहरहाल, केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा 972 ई-बसों को दी गई मंजूरी मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को एक नई दिशा देगी और राज्य को पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी।
