मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी में सामने आए कथित फर्जीवाड़े ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को हिला दिया है। मुरैना, भिंड और राजगढ़ जिलों में किसानों के नाम पर फर्जी पंजीयन कर सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने के मामले में अब प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितताएं मिलने के बाद मुरैना जिले की 10 सहकारी समितियों के प्रबंधकों और ऑपरेटरों सहित कुल 20 लोगों के खिलाफ एक साथ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में 15 पटवारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
यह कार्रवाई उस जांच के बाद हुई जिसमें फर्जी किसानों के नाम पर गेहूं बेचकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने की आशंका जताई गई।
क्या है पूरा मामला?
मध्यप्रदेश सरकार हर वर्ष किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदती है ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
लेकिन इस बार जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर ऐसे लोगों के नाम से पंजीयन कराया गया जिनके पास खेती योग्य जमीन ही नहीं थी, या जिनकी जमीन पर वास्तविक उत्पादन नहीं हुआ था। इसके बावजूद उनके नाम पर हजारों क्विंटल गेहूं सरकारी खरीद केंद्रों में बेच दिया गया।
बताया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में राजस्व रिकॉर्ड, किसान पंजीयन और खरीदी प्रक्रिया में कई स्तरों पर गड़बड़ियां की गईं।
10 समितियों पर कार्रवाई
जांच के बाद जिन समितियों के प्रबंधकों और ऑपरेटरों पर एफआईआर दर्ज की गई उनमें प्रमुख रूप से—
चेना समिति
राठाखुर्द समिति
भैंसरोली समिति
जेतपुरा समिति
परसोटा समिति
नितेरा समिति
रुसिया समिति
खेरवा समिति
अन्य संबंधित समितियां शामिल हैं।
इन समितियों के प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों पर फर्जी पंजीयन तथा रिकॉर्ड में हेरफेर करने के आरोप लगाए गए हैं।
15 पटवारी पहले ही सस्पेंड
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच के शुरुआती चरण में ही 15 पटवारियों को निलंबित कर दिया था।
आरोप है कि किसानों की जमीन और फसल संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन सही तरीके से नहीं किया गया। इसी का फायदा उठाकर फर्जी पंजीयन किए गए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
भिंड में भी जांच तेज
भिंड जिले में भी जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
जांच में कई ऐसे किसानों के नाम सामने आए हैं जिनकी जमीन पर वास्तविक उत्पादन नहीं था लेकिन उनके नाम पर बड़ी मात्रा में गेहूं समर्थन मूल्य पर बेच दिया गया।
जिला प्रशासन अब संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।
राजगढ़ में भी खुली गड़बड़ी
राजगढ़ जिले में भी समर्थन मूल्य खरीदी के दौरान कई अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं।
जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर खरीदी कराई गई।
प्रशासन ने ऐसे सभी मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
किसानों को नहीं होगी परेशानी
सरकार का कहना है कि वास्तविक किसानों के भुगतान पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा।
केवल फर्जी पंजीयन कराने वाले और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों पर कार्रवाई होगी।
जिन किसानों ने नियमों के अनुसार गेहूं बेचा है, उन्हें किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।
आगे क्या होगा?
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस मामले की विवेचना करेगी।
बैंक खातों की जांच होगी।
खरीदी रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
भुगतान की जानकारी जुटाई जाएगी।
राजस्व रिकॉर्ड की दोबारा जांच होगी।
जरूरत पड़ने पर और लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
यदि जांच में सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता साबित होती है तो उनके खिलाफ भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेशभर में बढ़ सकती है जांच
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की अनियमितताएं अन्य जिलों में भी मिलीं तो सरकार पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर समर्थन मूल्य खरीदी की जांच करा सकती है।
इससे भविष्य में फर्जी पंजीयन और सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।