किसानों के लिए बड़ी राहत! केंद्र ने जारी किए MSP पर खरीद के आदेश, जानिए कब से और कैसे होगी खरीदी

Farmer MSP Update: मूंग, मूंगफली समेत खरीफ फसलों की सरकारी खरीद 24 नवंबर से शुरू होकर 90 दिनों तक चलेगी;.
 
Farmer MSP Update:

Farmer MSP Update: ​केंद्र सरकार की ओर से देश के किसानों को लंबे इंतजार के बाद बड़ी राहत देते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीफ फसलों की खरीद के आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह खबर उन लाखों किसानों के लिए किसी खुशखबरी से कम नहीं है, जो अपनी फसलों को उचित दाम पर बेचने का इंतजार कर रहे थे और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे थे। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, मूंग, मूंगफली, उड़द और सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की सरकारी खरीद अब निर्धारित तारीख, 24 नवंबर, 2025 से शुरू होगी। यह खरीद प्रक्रिया अगले 90 दिनों तक लगातार जारी रहेगी, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का मौका मिलेगा और उनकी आय में सीधा लाभ होने की उम्मीद है।

​यह खरीद मुख्य रूप से नैफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से की जाएगी। इस बार की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण और आवश्यक बदलाव किया गया है। अब समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद बायोमीट्रिक पहचान के आधार पर की जाएगी। इस नए नियम के तहत, किसानों को अब ओटीपी (OTP) आधारित सत्यापन की सुविधा नहीं दी जाएगी। सरकार का यह कदम खरीद प्रक्रिया में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि केवल पात्र और पंजीकृत किसान ही इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ उठा सकें, जिससे सरकारी धन का सही उपयोग हो सके।

​राज्य के सहकारिता विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार संपूर्ण राजस्थान में खरीफ फसलों की बड़े पैमाने पर खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसमें मूंग के लिए 3 लाख 5 हजार 750 मीट्रिक टन, उड़द के लिए 1 लाख 68 हजार मीट्रिक टन, मूंगफली के लिए 5 लाख 54 हजार 750 मीट्रिक टन और सोयाबीन के लिए 2 लाख 65 हजार मीट्रिक टन तक खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरे राज्य में सहकारी समितियों पर सैकड़ों खरीद केंद्र बनाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, सीकर जिले में सीकर, दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर, खंडेला, लक्ष्मणगढ़, फतेहपुर और नीमकाथाना में खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां हजारों किसान पहले ही रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं।

​किसानों में इस सरकारी खरीद प्रक्रिया को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। अब तक प्राप्त रजिस्ट्रेशन की संख्या इस बात का प्रमाण है कि किसान उचित मूल्य के लिए सरकार की ओर देख रहे हैं। मूंग के लिए 97 हजार से अधिक किसानों ने, मूंगफली के लिए लगभग 1.87 लाख किसानों ने, सोयाबीन के लिए 26 हजार से ज्यादा और उड़द के लिए 1681 किसानों ने पहले ही अपनी फसलों को बेचने के लिए पंजीकरण करवा लिया है। इन फसलों के लिए घोषित समर्थन मूल्य भी काफी आकर्षक हैं, जिससे किसानों को लाभ होगा। मूंग के लिए 8,768 रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली के लिए 7,263 रुपए प्रति क्विंटल, उड़द के लिए 7,800 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन के लिए 5,328 रुपए प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य घोषित किया गया है।

​खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में, हाल ही में बीकानेर और चूरू जिलों में सामने आए फर्जी गिरदावरी और पंजीकरण के मामलों की गंभीरता से जांच की गई। जांच के दौरान, बीकानेर में 5,954 और चूरू में 9,819 फर्जी पंजीकरण पाए गए, जिन्हें राजफैड (Rajfed) ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। राजफैड ने सभी खरीद केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि वे खरीद सीमा तक नए और पात्र किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करें ताकि कोई भी योग्य किसान इस सरकारी समर्थन से वंचित न रह जाए और फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म किया जा सके।

​हालांकि, इस खरीद प्रक्रिया में एक चिंता का विषय भी है। सामान्यतः खरीफ फसलों की खरीद 1 नवंबर से शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार सरकारी आदेशों में हुई देरी के कारण 70 प्रतिशत से अधिक किसान अपनी उपज पहले ही खुले बाजार में कम दामों पर बेच चुके हैं। किसानों को औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचने को मजबूर होना पड़ा, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। हालांकि, अब जो किसान अपनी शेष उपज बेचने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए सरकार द्वारा घोषित उच्च समर्थन मूल्य (जैसे मूंग के लिए 8,768 रुपए और मूंगफली के लिए 7,263 रुपए) एक बड़ी राहत लेकर आया है। राजफैड की गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी जिले में कुल उपज के केवल 25 प्रतिशत तक ही सरकारी खरीद की जाएगी। यह सीमा यह दर्शाती है कि सरकारी खरीद एक निश्चित दायरे तक ही सीमित रहेगी, लेकिन यह बचे हुए किसानों के लिए उनकी फसल का सही दाम दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसानों को उम्मीद है कि इस निर्धारित खरीद से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल पाएगा। यह खरीद प्रक्रिया आने वाले 90 दिनों तक किसानों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनी रहेगी। 

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