रोझोही न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में फिर शुरू हुआ चिता आंदोलन, 10 दिन की मोहलत खत्म

रीवा के रोझोही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में चिता आंदोलन फिर शुरू। 10 दिन की प्रशासनिक समय-सीमा खत्म होने पर प्रमोद शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा।
 
Mptezkhar

रोझोही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में फिर शुरू हुआ चिता आंदोलन, 10 दिन की मोहलत खत्म होते ही ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा

 रोझोही परमाणु ऊर्जा परियोजना के खिलाफ आंदोलन फिर तेज, गंगा तालाब में जुटे ग्रामीण; प्रमोद शर्मा ने कहा- जनता की सहमति के बिना परियोजना स्वीकार नहीं

 रीवा। मध्यप्रदेश के रीवा जिले के रोझोही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु ऊर्जा संयंत्र) के विरोध में चल रहा जनआंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। प्रशासन को दी गई 10 दिनों की समय-सीमा समाप्त होने के बाद आंदोलनकारियों ने दोबारा मोर्चा खोल दिया है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रमोद शर्मा के रोझोही पहुंचते ही चिता आंदोलन के रूप में विरोध प्रदर्शन फिर शुरू कर दिया गया।

 

आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार करने और समाधान निकालने के लिए 10 दिन का समय मांगा था, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों में नाराजगी बढ़ गई है।

 

17 अक्टूबर से शुरू हुआ था जल सत्याग्रह

 

रोझोही में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने 17 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू किया था। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण गंगा तालाब में उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

 

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि स्थानीय जनता की सहमति के बिना क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा परियोजना को लागू नहीं किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण, खेती, पानी, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के जीवन पर भी पड़ सकता है।

 

आमरण अनशन और आंदोलनकारी की मौत से बढ़ा मामला

जल सत्याग्रह के दौरान आंदोलन ने गंभीर रूप ले लिया था। आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन भी शुरू कर दिया था। इसी दौरान आंदोलनकारी विमला आदिवासी की मृत्यु और बबली कोल की बिगड़ती तबीयत ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया था।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रमोद शर्मा ने भी आमरण अनशन शुरू किया था। उन्होंने 26 अक्टूबर को पानी पीना भी बंद कर दिया था। लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और आंदोलनकारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

उस समय प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के बाद आंदोलन समाप्त कराया गया था। साथ ही प्रशासन को मांगों पर कार्रवाई और समस्याओं के निराकरण के लिए 10 दिनों का समय दिया गया था।

समय-सीमा खत्म, फिर गंगा तालाब पहुंचे आंदोलनकारी

निर्धारित समय पूरा होने के बाद भी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने से आंदोलनकारियों ने फिर से विरोध शुरू करने का निर्णय लिया। प्रमोद शर्मा के रोझोही पहुंचते ही आंदोलन को चिता आंदोलन के रूप में दोबारा प्रारंभ कर दिया गया।

इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण और आंदोलनकारी गंगा तालाब पहुंचे। यहां सभी ने एकत्रित होकर आगामी आंदोलन की रणनीति और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की। आंदोलनकारियों का कहना है कि अब संघर्ष को आगे किस रूप में बढ़ाया जाएगा, इसका निर्णय सामूहिक चर्चा और जनसहमति से लिया जाएगा।

प्रमोद शर्मा बोले- जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती

आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद शर्मा ने कहा कि प्रशासन ने आंदोलनकारियों से 10 दिन का समय मांगा था। लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासन पर भरोसा करते हुए आंदोलनकारियों ने समय दिया, लेकिन समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

उन्होंने कहा कि अब आंदोलन को नए स्वरूप में प्रारंभ किया गया है। रोझोही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय जनता की आशंकाओं का समाधान होना चाहिए। परियोजना को लेकर स्पष्ट निर्णय और प्रभावित लोगों की सहमति जरूरी है।

प्रमोद शर्मा ने कहा कि आंदोलन को दबाने या समय लेकर टालने से जनता की आवाज समाप्त नहीं होगी। ग्रामीण अपने अधिकारों, पर्यावरण और भविष्य की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखेंगे।

जल-जंगल-जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि रोझोही में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना का मुद्दा अब केवल एक गांव या संगठन तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय जनता के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी बड़ी परियोजना को लागू करने से पहले उसके संभावित प्रभावों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और प्रभावित लोगों की चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए।

फिलहाल रोझोही में आंदोलन दोबारा शुरू होने से प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। आने वाले दिनों में आंदोलनकारी किस तरह विरोध को आगे बढ़ाते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

रोझोही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट यानी परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध हो रहा है।

2. रोझोही में आंदोलन कब शुरू हुआ था?

आंदोलनकारियों के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू किया गया था।

3. आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहे हैं?

आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद शर्मा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।

4. ग्रामीणों की प्रमुख मांग क्या है?

ग्रामीणों की मांग है कि स्थानीय जनता की सहमति और उनकी आशंकाओं का समाधान किए बिना परियोजना आगे न बढ़ाई जाए।

5. आंदोलन दोबारा क्यों शुरू किया गया?

आंदोलनकारियों के अनुसार, प्रशासन को दिए गए 10 दिनों के समय में मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए विरोध दोबारा शुरू किया गया।

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