मध्यप्रदेश में मौसम के मिजाज में आए अचानक बदलाव ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पूरा प्रदेश भीषण शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में है। उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने तापमान में भारी गिरावट दर्ज की है, जिसके कारण छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और मंदसौर समेत लगभग 19 जिलों में स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।
किन जिलों में कितने दिनों की छुट्टी? (जिलावार सूची)
प्रशासन ने ठंड की तीव्रता को देखते हुए अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग आदेश जारी किए हैं:
इंदौर: कलेक्टर शिवम वर्मा ने शीतलहर के चलते नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के बच्चों के लिए 5 जनवरी से 7 जनवरी 2026 तक लगातार तीन दिनों का अवकाश घोषित किया है।
ग्वालियर: यहां अत्यधिक कोहरे और ठंड को देखते हुए कक्षा 8वीं तक के स्कूल 6 जनवरी तक बंद रहेंगे।
जबलपुर: संस्कारधानी में भी 5 और 6 जनवरी को अवकाश घोषित किया गया है।
उज्जैन: महाकाल की नगरी में कक्षा 5वीं तक के बच्चों के लिए छुट्टी के आदेश दिए गए हैं।
रायसेन: यहां छोटे बच्चों के लिए 7 जनवरी तक स्कूल बंद रखने के निर्देश हैं।
मंदसौर और नीमच: इन जिलों में 5 और 6 जनवरी को स्कूल बंद रहेंगे।
अन्य जिले: राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, आगर मालवा, टीकमगढ़, हरदा और रतलाम में भी 5 और 6 जनवरी को अवकाश घोषित किया गया है। इसके अलावा श्योपुर, झाबुआ, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सीधी और नर्मदापुरम में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार छुट्टी दी गई है।
भोपाल और धार में बदला गया स्कूलों का समय
राजधानी भोपाल और धार जिले में फिलहाल स्कूलों को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन उनके खुलने के समय में बदलाव किया गया है। भोपाल कलेक्टर के आदेशानुसार, नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के सभी सरकारी, निजी, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूल अब सुबह 9:30 बजे के बाद ही संचालित होंगे।
कोहरे और शीतलहर का कहर
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मध्यप्रदेश के 30 से अधिक जिलों में घने कोहरे का 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। सोमवार सुबह विजिबिलिटी (दृश्यता) 20 मीटर से भी कम दर्ज की गई, जिससे न केवल सड़क यातायात बल्कि रेल और हवाई सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ा है। कई ट्रेनें और फ्लाइट्स देरी से चल रही हैं।
अभिभावकों और स्कूलों के लिए निर्देश
यह आदेश सभी प्रकार के स्कूलों (शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त और सीबीएसई/आईसीएसई बोर्ड) पर समान रूप से लागू होगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इन आदेशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।