मध्य प्रदेश में कलेक्टर का बड़ा एक्शन: 5 तहसीलदार समेत 22 कर्मचारियों को नोटिस, वेतन कट सकता है
मध्य प्रदेश: कलेक्टर ने लापरवाही के आरोप में 5 तहसीलदार सहित 22 अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त नोटिस थमाया है। वेतन कटौती और आगे की कार्रवाई के आसार। प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा संदेश।
Sat, 10 Jan 2026
मध्य प्रदेश के सतना जिले में कलेक्टर द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। भारी नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने 5 तहसीलदारों सहित कुल 22 सरकारी कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है जिसमें वेतन कटौती और अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। ये कदम प्रशासन की कार्यशैली में सुधार लाने तथा सरकारी कार्यों में लापरवाही रोकने के लिए उठाया गया।
किसके नाम जारी किए नोटिस और क्यों?
स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक यह नोटिस उन कर्मचारियों को दिया गया है जिन पर अपने-अपने पदों पर लापरवाही, समय पर रिपोर्ट न देना, आवश्यक निर्देशों का पालन न करना, और निर्धारित जिम्मेदारियों में कमी करने का आरोप है। इसमें कुल 5 तहसीलदार शामिल हैं — जो तहसील स्तर पर सरकारी सेवाओं का समन्वय और निगरानी संभालते हैं। अन्य 17 कर्मचारी भी विभिन्न विभागों से शामिल हैं जिनके कर्तव्यों में चूक पाए जाने की बात कही जा रही है।
कलेक्टर की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि सरकारी सेवाओं का संचालन सुचारू और पारदर्शी होना चाहिए। यदि कर्मचारी समयबद्ध तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करते हैं या जनता की समस्याओं के समाधान में लापरवाही बरतते हैं, तो प्रशासन ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाएगा। इस कदम को प्रशासनिक उत्तरदायित्व को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशासन की नाराजगी — लैहजा सख्त
कलेक्टर ने उल्लेख किया कि अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य निष्पादन में कमी से सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। ऐसे में नोटिस जारी करना आवश्यक हो गया है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि “कोई भी कर्मचारी सरकारी आदेशों, समयसीमा, और जिम्मेदारियों को हल्के में न ले।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आगे विभागीय कार्रवाई, वेतन रोकना, या अनुशासनात्मक सजा भी दी जा सकती है।
प्रशासनिक सर्किल में यह कदम चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि प्रशासन बड़े स्तर पर गड़बड़ियों और लापरवाही से निपटने के लिए गंभीर रुख अपना रहा है। यह विशेष रूप से उन अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो अपने दायित्वों का पालन नहीं कर रहे हैं।
भर्ती, वेतन और आदेशों का पालन — क्यों जरूरी?
सरकारी सिस्टम में तहसीलदार एवं अन्य कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है — ये आम जनता और सरकार के बीच सीधे संपर्क में रहते हैं। इनसे जुड़े कार्यों में भूमि रिकॉर्ड, राजस्व मामलों का निपटारा, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन तथा शिकायतों का निस्तारण शामिल है। यदि इसी स्तर पर देरी या लापरवाही होती है, तो आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसलिए कलेक्टर का रवैया यह संकेत करता है कि मध्य प्रदेश प्रशासन अपने कार्यों की गति, जवाबदेही और जवाबदेही की भावना को बढ़ाना चाहता है — खासकर उन मामलों में जहां जनता की अपेक्षाएं और सरकारी जवाबदेही सीधे जुड़े हैं।
गतिविधियों का व्यापक असर
ये नोटिस केवल सतना जिले तक सीमित नहीं रहेगा। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि सभी जिलों के अधिकारियों को भी यह संदेश मिलेगा कि सरकारी कार्यों में ढील और लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों के मनोबल में सुधार और सरकारी कार्य संस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाने के प्रयास भी इसके हिस्से हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं। इससे सरकारी तंत्र में पारदर्शिता आती है और कर्मचारियों के बीच जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।
क्या अगले कदम होंगे?
प्रशासन द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि अधिकारियों की ओर से क्या जवाब आता है। आमतौर पर इन नोटिसों का जवाब प्रभावित अधिकारियों से अपेक्षित समय में मांगा जाता है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता है या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो वेतन में कटौती, निलंबन या अंततः विभागीय सजा तक की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
इसके साथ ही सरकारी विभागों में निगरानी और समीक्षा की प्रक्रियाओं को भी और सख्त किया जा सकता है ताकि भविष्य में इसी तरह की शिकायतें कम आएं। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सीधा प्रभाव जनता पर सकारात्मक रूप से पड़ेगा क्योंकि सेवाओं का स्तर सुधरेगा।
