रीवा में अपराध, भ्रष्टाचार और कोरेक्स का मुद्दा, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला के गृह क्षेत्र में उठे सवाल
विंध्य क्षेत्र का प्रमुख शहर रीवा इन दिनों कई सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर चर्चा में है। मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह क्षेत्र रीवा में अपराध, भ्रष्टाचार के आरोपों और नशीली दवाओं के कथित अवैध कारोबार को लेकर नागरिकों के बीच चिंता जताई जा रही है। खासतौर पर कोरेक्स जैसी कफ सिरप के नशे के रूप में दुरुपयोग का मुद्दा युवाओं और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सवाल यह है कि जब रीवा प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, तो यहां कानून-व्यवस्था, नशे पर नियंत्रण और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं?
रीवा में नशे का कारोबार बना बड़ी सामाजिक चुनौती
रीवा में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर सामने आए मामले इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। जुलाई 2026 में प्रकाशित इंडिया टुडे की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 31 मई 2026 के बीच रीवा संभाग के छह जिलों में पुलिस ने कोडीनयुक्त कफ सिरप की 84,547 बोतलें जब्त की थीं। इस दौरान NDPS एक्ट के तहत 685 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई थी।
रीवा में नशे का कारोबार बना बड़ी सामाजिक चुनौती
रीवा में कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर सामने आए मामले इस समस्या की गंभीरता को दर्शाते हैं। जुलाई 2026 में प्रकाशित इंडिया टुडे की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 31 मई 2026 के बीच रीवा संभाग के छह जिलों में पुलिस ने कोडीनयुक्त कफ सिरप की 84,547 बोतलें जब्त की थीं। इस दौरान NDPS एक्ट के तहत 685 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी दी गई थी।
यह आंकड़ा बताता है कि नशीली दवाओं का अवैध कारोबार केवल कुछ दुकानों या मोहल्लों तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। इसके पीछे सप्लाई नेटवर्क, अवैध भंडारण और नशे के लिए दवाओं के इस्तेमाल जैसे पहलुओं की जांच जरूरी है।
रीवा के कबाड़ी मोहल्ले का नाम भी कफ सिरप के अवैध कारोबार की खबरों में सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों में यहां अवैध बिक्री के नेटवर्क का उल्लेख किया गया है। हालांकि, किसी पूरे मोहल्ले या समुदाय को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। कार्रवाई वास्तविक आरोपियों और सप्लाई नेटवर्क पर होनी चाहिए।
युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा असर
नशीली कफ सिरप का दुरुपयोग युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है। कम उम्र में नशे की लत लगने से पढ़ाई, रोजगार, पारिवारिक संबंध और सामाजिक जीवन प्रभावित हो सकते हैं।
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में नशे की समस्या से प्रभावित लोगों के उपचार से जुड़े आंकड़ों का भी इंडिया टुडे की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में लगभग 2,000 लोग विभिन्न प्रकार के नशे की समस्या के उपचार के लिए पहुंचे थे। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जो कफ सिरप का भी दुरुपयोग कर रहे थे।
जनता को यह जानने का अधिकार है कि अवैध कारोबार के बड़े सप्लायर कौन हैं, दवाएं कहां से आती हैं, उनका वितरण किन माध्यमों से होता है और इस नेटवर्क को आर्थिक मदद कौन पहुंचाता है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह क्षेत्र में जवाबदेही की अपेक्षा
रीवा मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह क्षेत्र और विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में यहां की कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं, युवाओं की सुरक्षा और नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लोगों की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि इंडिया टुडे की रिपोर्ट में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के हवाले से कफ सिरप की सप्लाई रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि नशे के इस नेटवर्क को रोकना सरकार के सामने भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
रीवा केवल एक राजनीतिक पहचान वाला शहर नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आर्थिक पहचान भी है। यहां के युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।
नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ दवा नियंत्रण विभाग की जवाबदेही, भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा है कि वे इन चुनौतियों पर ठोस कार्ययोजना बनाकर जनता के सामने कार्रवाई का स्पष्ट ब्यौरा रखें। आखिरकार सवाल किसी राजनीतिक पद या व्यक्ति का नहीं, बल्कि रीवा के भविष्य और यहां रहने वाले लाखों लोगों की सुरक्षा का है।
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