मध्य प्रदेश की राजनीति और समाज कल्याण योजनाओं में 'लाड़ली' शब्द एक ब्रांड बन चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की गई लाड़ली लक्ष्मी योजना और उसके बाद आई लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के जीवन को प्रभावित किया है। हालांकि, हालिया रिपोर्टों और आंकड़ों ने एक नई बहस छेड़ दी है। क्या इन योजनाओं का लाभ वास्तव में लक्षित आबादी तक पहुंच पा रहा है? आखिर क्यों 27 महीनों में 6.28 लाख 'लाड़ली बहनें' कम हो गईं?
लाड़ली लक्ष्मी योजना: 1 लाख रुपये का गणित और 20% का सच
लाड़ली लक्ष्मी योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों के प्रति समाज की मानसिकता बदलना और उनकी शिक्षा व भविष्य को सुरक्षित करना है। लेकिन ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि केवल 20 प्रतिशत बेटियां ही उस 1 लाख रुपये की परिपक्वता (maturity) राशि तक पहुंच पाएंगी।
इसके पीछे के मुख्य कारण:
कठोर पात्रता शर्तें: योजना का लाभ लेने के लिए बेटी का 12वीं तक पढ़ाई करना और 18 वर्ष तक विवाह न करना अनिवार्य है।
ड्रॉपआउट दर: ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी उच्च शिक्षा के लिए बेटियों का स्कूल छोड़ना एक बड़ी चुनौती है।
दस्तावेजी प्रक्रिया: कई परिवार समय पर आवश्यक प्रमाणपत्र अपडेट नहीं कर पाते, जिससे वे योजना से बाहर हो जाते हैं।
लाड़ली बहना योजना: 27 माह में 6.28 लाख महिलाएं कम होने का विश्लेषण
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 'लाड़ली बहना योजना' से जुड़ा है। पिछले 27 महीनों में लाभार्थियों की संख्या में 6.28 लाख की कमी आई है। इसके पीछे कई तकनीकी और नीतिगत कारण हो सकते हैं:
आयु सीमा और अपात्रता: 60 वर्ष की आयु पार करने वाली महिलाएं स्वतः ही वृद्धावस्था पेंशन की श्रेणी में आ जाती हैं, जिससे वे इस योजना से बाहर हो सकती हैं।
e-KYC की अनिवार्यता: सरकार ने पारदर्शिता के लिए e-KYC और बैंक डीबीटी (DBT) सक्रिय होना अनिवार्य किया है। कई महिलाएं तकनीकी कारणों से इसे पूरा नहीं कर पाईं।
आयकर और सरकारी सेवा: जांच के दौरान पाया गया कि कई लाभार्थी परिवार आयकर श्रेणी में आते हैं या उनके परिवार में कोई सरकारी सेवा में है।
सरकारी पक्ष और विपक्ष के तर्क
सरकार का मानना है कि यह "फिल्टरेशन" प्रक्रिया का हिस्सा है ताकि केवल पात्र और जरूरतमंद महिलाओं को ही पैसा मिले। वहीं, विपक्ष इसे बजट कटौती और छंटनी का नाम दे रहा है।
योजना मुख्य लक्ष्य वर्तमान चुनौती
लाड़ली लक्ष्मी लिंगानुपात सुधारना, शिक्षा परिपक्वता राशि तक पहुंच (Retention)
लाड़ली बहना आर्थिक सशक्तिकरण डेटा शुद्धिकरण और पात्रता
आगे की राह: सुझाव और समाधान
सरलीकरण: आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया जाना चाहिए।
जागरूकता अभियान: विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि 'लाड़ली लक्ष्मी' अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
पोर्टल में सुधार: तकनीकी खामियों के कारण किसी भी पात्र महिला का नाम नहीं कटना चाहिए।