MP में बिजली बिल का 'करंट': अप्रैल से 16% तक महंगी हो सकती है बिजली; जानें आपकी जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ!

मध्य प्रदेश में बिजली कंपनियां 10.19% से 16% तक टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में हैं। अगर नियामक आयोग ने मंजूरी दी, तो 1 अप्रैल 2026 से उपभोक्ताओं पर करोड़ों का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
 
Bijli

MP Electricity Bill Hike 2026: मध्य प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला नया वित्तीय वर्ष (2026-27) आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रदेश की तीनों बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) ने राज्य विद्युत नियामक आयोग (MPERC) को अपना नया टैरिफ प्रस्ताव भेज दिया है। इस प्रस्ताव में बिजली की दरों में 10.19% से लेकर 16% तक की बढ़ोतरी की मांग की गई है। यदि इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो प्रदेश में बिजली के दाम पिछले कई वर्षों के मुकाबले सबसे ऊंचे स्तर पर पहुँच जाएंगे।

कितना बढ़ेगा आपका बिल? (अनुमानित आंकड़े)

बिजली कंपनियों के प्रस्ताव के अनुसार, अलग-अलग स्लैब के उपभोक्ताओं पर इसका असर अलग होगा। सबसे ज्यादा मार मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ने वाली है: 

खपत (यूनिट में) वर्तमान अनुमानित बिल (₹) प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद (₹) अतिरिक्त बोझ (प्रति माह)
150 यूनिट तक ₹1,400 ₹1,550 - ₹1,600 ₹150 - ₹200
300 यूनिट तक ₹2,800 ₹3,100 - ₹3,200 ₹300 - ₹400
400 यूनिट से अधिक ₹4,000+ ₹4,500 - ₹4,600 ₹500 - ₹600

बढ़ोतरी की मुख्य वजह: 6,000 करोड़ का घाटा

बिजली कंपनियों ने इस भारी बढ़ोतरी के पीछे लगभग 6,044 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का हवाला दिया है। कंपनियों का तर्क है कि:

  • बिजली उत्पादन की लागत (कोयला और परिवहन) में वृद्धि हुई है।

  • पुराने बुनियादी ढांचे के रखरखाव और स्मार्ट मीटर लगाने में भारी निवेश किया जा रहा है।

  • परिचालन व्यय (Operating Expenses) में पिछले साल के मुकाबले काफी इजाफा हुआ है।

विरोध में उतरे उपभोक्ता संगठन

टैरिफ बढ़ाने के इस प्रस्ताव का उपभोक्ता समूहों और विशेषज्ञों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। रिटायर्ड इंजीनियरों और विशेषज्ञों का तर्क है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में कोयले पर से कई तरह के सेस (Cess) हटाए हैं, जिससे बिजली उत्पादन की लागत 25 पैसे प्रति यूनिट कम होनी चाहिए थी। ऐसे में उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय बोझ डालना तर्कसंगत नहीं है।

क्या है आगे की प्रक्रिया?

  1. सार्वजनिक सुनवाई: नियामक आयोग इस प्रस्ताव पर जनता की आपत्तियां आमंत्रित करेगा। भोपाल और अन्य बड़े शहरों में हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में सुनवाई होगी।

  2. अंतिम फैसला: सुनवाई के बाद आयोग तय करेगा कि दरों में कितनी वृद्धि की अनुमति दी जाए।

  3. लागू होने की तारीख: नई दरें 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने की संभावना है।

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