मध्यप्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मनगवां थाना के पूर्व थाना प्रभारी (TI) गजेंद्र सिंह धाकड़ पिछले करीब 100 दिनों से लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस विभाग के लिए यह मामला अब एक बड़ी चुनौती बन चुका है। Suspended Police Inspector Gajendra Singh Dhakad के अचानक गायब हो जाने के बाद विभागीय स्तर पर लगातार उनकी तलाश की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
जानकारी के अनुसार गजेंद्र सिंह धाकड़ को विभागीय कारणों से निलंबित किया गया था। निलंबन आदेश प्राप्त होने के बाद उन्होंने रोजनामचा में खुद को ‘सिक’ (बीमार) दर्ज कराया और थाना परिसर से रवाना हो गए। इसके बाद उन्हें पुलिस लाइन में आमद देनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। तभी से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार गजेंद्र सिंह धाकड़ मनगवां थाना में पदस्थ थे। कुछ मामलों को लेकर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जारी Suspension Order के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पुलिस लाइन अटैच किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
निलंबन आदेश मिलने के बाद उन्होंने थाने के रोजनामचा में स्वास्थ्य खराब होने का उल्लेख किया और वहां से चले गए। सामान्य प्रक्रिया के अनुसार उन्हें पुलिस लाइन रीवा में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी, लेकिन उन्होंने वहां रिपोर्ट नहीं की।
इसके बाद विभाग ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल फोन बंद मिला। कई दिनों तक संपर्क नहीं होने पर अधिकारियों को संदेह हुआ कि मामला सामान्य नहीं है।
100 दिन बाद भी नहीं मिला कोई सुराग
बताया जा रहा है कि गजेंद्र सिंह धाकड़ को लापता हुए लगभग 100 दिन से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान पुलिस ने कई स्तरों पर उनकी तलाश की है।
Police Search Operation के तहत उनके संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया गया। मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी उनकी जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वे स्वेच्छा से कहीं गए हैं या किसी अन्य परिस्थिति का सामना कर रहे हैं।
मोबाइल लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की तकनीकी टीम भी सक्रिय है। Cyber Cell और Technical Surveillance Unit की मदद से उनके मोबाइल नंबरों की Call Detail Records (CDR) और Location Tracking की जा रही है।
हालांकि बताया जा रहा है कि उनका मोबाइल लंबे समय से बंद है, जिससे लोकेशन ट्रेस करने में कठिनाई आ रही है।
तकनीकी विशेषज्ञ पुराने डेटा के आधार पर Last Active Location निकालने का प्रयास कर रहे हैं। इससे उम्मीद है कि जांच को कोई नई दिशा मिल सकती है।
परिवार भी परेशान
पूर्व TI के परिवारजन भी उनकी गुमशुदगी को लेकर बेहद चिंतित बताए जा रहे हैं। परिवार के सदस्यों ने भी कई स्तरों पर उनकी तलाश की है।
रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों से संपर्क किया गया लेकिन किसी के पास उनकी कोई जानकारी नहीं है। परिवार को उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही उन्हें खोज निकालेगी।
विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज है अनुपस्थिति
पुलिस विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार निलंबन के बाद से गजेंद्र सिंह धाकड़ ने किसी भी कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है।
Departmental Inquiry में यह तथ्य सामने आया है कि वे लगातार अनुपस्थित हैं। उनके संबंध में विभागीय दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई नई जानकारी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के सामने कई सवाल
इस पूरे मामले ने पुलिस विभाग के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या निलंबन के बाद वे मानसिक दबाव में थे?
क्या उन्होंने स्वेच्छा से कहीं जाने का निर्णय लिया?
क्या किसी घटना या साजिश का शिकार हुए?
आखिर 100 दिनों से उनका कोई सुराग क्यों नहीं मिल रहा?
इन सवालों के जवाब अभी जांच के दायरे में हैं।
रीवा जिले में चर्चा का विषय
गजेंद्र सिंह धाकड़ के लापता होने की खबर रीवा सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। आमतौर पर पुलिस अधिकारी किसी मामले की जांच करते हैं, लेकिन यहां खुद एक पुलिस अधिकारी का पता नहीं चल पा रहा है।
लोग सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय तक किसी अधिकारी का लापता रहना गंभीर चिंता का विषय है।
पुलिस कर रही हर एंगल से जांच
जांच एजेंसियां मामले को विभिन्न पहलुओं से देख रही हैं।
प्रमुख जांच बिंदु
Mobile Location Analysis
Financial Transactions Verification
Family and Friends Interrogation
Travel Records Examination
Digital Footprint Investigation
Bank Account Monitoring
CCTV Footage Analysis
इन सभी बिंदुओं पर अलग-अलग टीमें काम कर रही हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की नजर
रीवा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला विभाग की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है।
जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो इसके लिए नियमित समीक्षा की जा रही है।
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
देश के विभिन्न हिस्सों में पहले भी कुछ पुलिस अधिकारियों के अचानक लापता होने के मामले सामने आए हैं। कई मामलों में अधिकारी बाद में सुरक्षित मिल गए, जबकि कुछ मामलों में जांच लंबे समय तक चली।
हालांकि रीवा का यह मामला इसलिए अलग माना जा रहा है क्योंकि यहां 100 दिन से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी कोई स्पष्ट सुराग सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कानूनी और पुलिस मामलों के जानकारों का मानना है कि किसी भी अधिकारी का लंबे समय तक संपर्क से बाहर रहना असामान्य स्थिति है।
Experts का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में तकनीकी जांच, वित्तीय रिकॉर्ड और सामाजिक संपर्कों का गहन विश्लेषण महत्वपूर्ण होता है।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता गजेंद्र सिंह धाकड़ का पता लगाना है। जांच एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
परिवार, पुलिस विभाग और आम जनता सभी इस मामले में किसी सकारात्मक खबर का इंतजार कर रहे हैं।