सोने और चांदी की कीमतों में जुलाई की शुरुआत बड़े उतार-चढ़ाव के साथ हुई है। मंगलवार, 1 जुलाई को घरेलू वायदा बाजार (MCX) और अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) दोनों में कीमती धातुओं के दाम सात महीने के निचले स्तर तक फिसल गए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली ने सोने-चांदी पर दबाव बढ़ा दिया।
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी साबित हो सकती है। यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं और फेड ब्याज दरों में कटौती की ओर बढ़ता है, तो सोने में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
सात महीने के निचले स्तर पर पहुंचा सोना
जुलाई के पहले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना कमजोर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX पर भी गोल्ड में बिकवाली का दबाव बना रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कई महीनों से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है। इसी कारण सोना लगातार दबाव में बना हुआ है।
चांदी में भी आई बड़ी कमजोरी
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स में कमजोरी देखने को मिली। औद्योगिक मांग में संभावित नरमी और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण चांदी की कीमतें भी प्रभावित हुईं।
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि चांदी में अस्थिरता सोने की तुलना में अधिक रहती है, इसलिए इसमें तेजी से रिकवरी की संभावना भी बनी रहती है।
क्यों गिरे सोने-चांदी के दाम?
विशेषज्ञ कई प्रमुख कारण बता रहे हैं—
1. अमेरिकी फेड की नीति
फेडरल रिजर्व ने अभी तक ब्याज दरों में कटौती का स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। ऊंची ब्याज दरें सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश को कम आकर्षक बनाती हैं।
2. डॉलर की मजबूती
डॉलर इंडेक्स मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि सोने की खरीद अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगी हो जाती है।
3. मुनाफावसूली
हाल के महीनों में सोने ने रिकॉर्ड स्तर बनाए थे। ऐसे में कई बड़े निवेशकों ने लाभ बुक करना शुरू किया, जिससे कीमतों में गिरावट आई।
4. शेयर बाजार में मजबूती
जब शेयर बाजार बेहतर प्रदर्शन करता है तो निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश से हटकर इक्विटी की ओर बढ़ जाता है। इसका असर सोने पर भी पड़ता है।
आगे कैसी रहेगी सोने की चाल?
कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह सोने के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे।
यदि अमेरिका में महंगाई के आंकड़े कमजोर आते हैं और फेड ब्याज दरों में कटौती का संकेत देता है तो सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है।
दूसरी ओर यदि डॉलर लगातार मजबूत बना रहता है और ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने में दबाव कुछ समय और जारी रह सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध निवेश करें।
हर गिरावट पर थोड़ी-थोड़ी खरीदारी बेहतर रणनीति हो सकती है।
पोर्टफोलियो का 10–15 प्रतिशत हिस्सा गोल्ड में रखना संतुलित माना जाता है।
केवल शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के लिए अधिक जोखिम न लें।
क्या अभी खरीदना चाहिए?
अगर आपका निवेश लक्ष्य लंबी अवधि का है, जैसे 3 से 5 साल, तो मौजूदा गिरावट एक अच्छा अवसर हो सकती है।
हालांकि अल्पकालिक निवेशकों को अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर इंडेक्स और फेड की अगली बैठक पर नजर रखनी चाहिए।
भारतीय बाजार पर क्या असर?
भारत में सोने की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार से ही नहीं बल्कि डॉलर-रुपया विनिमय दर और आयात शुल्क से भी प्रभावित होती हैं।
यदि रुपया कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू कीमतों में सीमित गिरावट देखने को मिल सकती है।
शादी और त्योहारों के सीजन पर प्रभाव
सोने की कीमतों में आई गिरावट का फायदा आम उपभोक्ताओं को मिल सकता है। आने वाले शादी और त्योहारों के सीजन में ज्वेलरी की मांग बढ़ने की संभावना है।
ज्वेलर्स का मानना है कि कीमतों में नरमी आने से ग्राहकों की खरीदारी बढ़ सकती है।
क्या फिर बनेंगे नए रिकॉर्ड?
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद और ब्याज दरों में संभावित कटौती जैसे कारक लंबे समय में सोने को फिर से नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।
हालांकि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।