किसानों के लिए खुशखबरी: 193 करोड़ की परियोजना से खेतों तक पहुंचेगा सीधा फायदा!

किसानों के लिए बड़ी खबर! सरकार ने 193 करोड़ की लागत वाली नई सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी है। जानें कैसे इस योजना से आपकी फसल और आमदनी दोगुनी होगी।
 
भारत

​भारत एक कृषि प्रधान देश है, और यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान हैं। समय-समय पर सरकारें किसानों की समस्याओं को हल करने और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं लाती रहती हैं। इसी कड़ी में, राजस्थान सरकार की 193 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजना एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है।

​क्या है 193 करोड़ की यह योजना?

​इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों का कुशल प्रबंधन करना और यह सुनिश्चित करना है कि सिंचाई का पानी सीधे किसान के खेत तक पहुंचे। अक्सर देखा जाता है कि बड़ी नहरों से पानी तो आता है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण वह अंतिम छोर (Tail end) के किसानों तक नहीं पहुँच पाता। 193 करोड़ की इस भारी-भरकम राशि का उपयोग नहरों के जीर्णोद्धार, नई पाइपलाइन बिछाने और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को विकसित करने में किया जाएगा।

​योजना के मुख्य आकर्षण और लाभ

​इस परियोजना के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे जो सीधे तौर पर कृषि क्षेत्र को प्रभावित करेंगे:

​पक्की नहरों का निर्माण: कच्चे खाालों और टूटी हुई नहरों की मरम्मत की जाएगी ताकि पानी का रिसाव (Seepage) कम हो।

​अंतिम छोर तक पानी की पहुंच: इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा लाभ उन किसानों को मिलेगा जिनकी जमीनें मुख्य जल स्रोत से दूर हैं।

​आधुनिक तकनीक का समावेश: परियोजना में स्प्रिंकलर (फव्वारा सिंचाई) और ड्रिप इरिगेशन को बढ़ावा देने के प्रावधान हैं।

​मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार: जलभराव की समस्या खत्म होने से भूमि की उर्वरता बनी रहेगी।

​किसानों की आय पर प्रभाव

​जब किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में पानी मिलेगा, तो वे साल में दो से अधिक फसलें ले सकेंगे। उन्नत सिंचाई से बीज की बर्बादी कम होती है और खाद का असर भी बेहतर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस 193 करोड़ की परियोजना से संबंधित क्षेत्र के किसानों की आय में 25-30% तक की वृद्धि हो सकती है।

​जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

​आज के दौर में पानी की एक-एक बूंद कीमती है। यह परियोजना न केवल पानी पहुँचाने पर केंद्रित है, बल्कि 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) के सिद्धांत पर आधारित है। पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुँचाने से वाष्पीकरण (Evaporation) कम होता है, जिससे कम पानी में अधिक भूमि सींची जा सकती है।

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