त्योंथर पॉक्सो कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास

रीवा जिले के अतरेला थाना क्षेत्र का मामला, मुख्य आरोपी शिव नारायण उर्फ राजा बाबू कोल को सजा; सहयोगी महिला दोषमुक्त।
 
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मध्य प्रदेश के रीवा जिले में, त्योंथर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो (POCSO) न्यायालय ने एक नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। न्यायालय का यह फैसला यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत एक महत्वपूर्ण निर्णय है, जो समाज में ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति कड़ा संदेश देता है।
​मामले का घटनाक्रम
यह पूरा घटनाक्रम 16 मार्च 2020 का है। रीवा जिले के अतरेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक नाबालिग किशोरी लापता हो गई थी। किशोरी के पिता ने तुरंत अतरेला थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने आरोपी शिव नारायण उर्फ राजा बाबू कोल को नामजद किया था। शिकायत दर्ज होने के बाद, पुलिस ने जांच शुरू की और लापता किशोरी को ढूंढने के लिए कार्रवाई की।
​किशोरी की दस्तियाबी और कोर्ट के समक्ष बयान
जांच के दौरान, पुलिस ने किशोरी को गुजरात के सूरत शहर से दस्तियाब (recovered) किया। किशोरी को इसके बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां उसने अपना बयान दर्ज कराया। किशोरी द्वारा न्यायालय के समक्ष दिए गए बयान के अनुसार, आरोपी शिव नारायण द्वारा उसके साथ लगातार संबंध बनाए गए। इस गंभीर यौन शोषण के कारण किशोरी को एक बच्चा भी पैदा हुआ था। यह तथ्य मामले की गंभीरता को और अधिक बढ़ा देता है, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लिया।
​विशेष न्यायाधीश का निर्णय
त्योंथर न्यायालय के विशेष न्यायाधीश पास्को ने सभी सबूतों, गवाहों के बयानों और कानूनी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। न्यायालय ने आरोपी शिव नारायण उर्फ राजा बाबू कोल को दोषी पाया और उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा, आरोपी पर 2000 रुपये का अर्थदंड (fine) भी लगाया गया है। न्यायालय का यह फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
​सहयोगी महिला दोषमुक्त
इस पूरे मामले में एक सहयोगी महिला पर भी आरोप था। हालांकि, न्यायालय ने सहयोगी महिला को दोष मुक्त कर दिया है। न्यायालय ने महिला को दोष मुक्त करते हुए यह सुनिश्चित किया कि साक्ष्यों के आधार पर ही न्याय किया जाए।
​इस महत्वपूर्ण मामले में अभियोजन पक्ष की पैरवी विशेष लोक अभियोजन पास्को (Special Public Prosecutor POCSO) धीरज सिंह द्वारा की गई। उनकी मजबूत पैरवी और कानूनी प्रक्रिया के पालन के कारण ही न्यायालय इस गंभीर मामले में आरोपी को कठोरतम सजा सुना सका।
​यह फैसला समाज में एक मजबूत संदेश देता है कि नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों के खिलाफ कानून सख्त है और अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।