MP के कर्मचारियों को तगड़ा झटका! अब जेब से कटेंगे 42,000 रुपये, जानें सरकार का नया आदेश

मध्यप्रदेश के तीन जिलों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बुरी खबर। सरकार के नए फैसले से भत्ते बंद, हर कर्मचारी को होगा 42 हजार रुपये का वार्षिक नुकसान। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
 
MP Employees Allowance Cut

मध्यप्रदेश के तीन विशिष्ट जिलों में कार्यरत शासकीय सेवकों को मिलने वाले विशेष भत्तों को लेकर हाल ही में नए दिशा-निर्देश जारी हुए हैं। इन निर्देशों के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अब कर्मचारियों को मिलने वाला एक निश्चित भत्ता बंद कर दिया जाएगा या उसकी गणना में बदलाव किया गया है।

​अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों का अनुमान है कि इस कटौती का सीधा असर उनकी सालाना आय पर पड़ेगा। गणना के अनुसार, निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर राजपत्रित अधिकारियों तक, यह नुकसान औसतन 42,000 रुपये के आसपास बैठ रहा है।

​इन तीन जिलों पर गिरेगी गाज

​हालांकि पत्रिका की रिपोर्ट में विशिष्ट परिस्थितियों का जिक्र है, लेकिन आमतौर पर इस तरह के भत्ते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, आदिवासी क्षेत्रों या अति दुर्गम क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों को दिए जाते हैं। इन तीन जिलों में शामिल कर्मचारियों को 'विशेष भत्ता' या 'क्षेत्रीय भत्ता' दिया जा रहा था, जिसे अब तकनीकी आधार पर रोकने की तैयारी है।

​नुकसान का गणित: कैसे कम होंगे 42 हजार?

​कर्मचारियों के वेतन से होने वाली इस कटौती को निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

​मासिक भत्ते में कटौती: यदि किसी कर्मचारी का मासिक भत्ता 3,500 रुपये कम होता है, तो साल भर में यह राशि 42,000 रुपये हो जाती है।

​DA (महंगाई भत्ता) का प्रभाव: भत्तों पर मिलने वाले एरियर और अन्य लाभ भी इस कटौती के दायरे में आएंगे।

​पदोन्नति और इंक्रीमेंट: भत्ते बंद होने से भविष्य में होने वाले वेतन निर्धारण पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

​कर्मचारी संगठनों में आक्रोश

​इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका तर्क है कि:

​कठिन परिस्थितियां: इन जिलों में सेवाएं देना अन्य जिलों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है।

​महंगाई की मार: एक तरफ जहां केंद्र और राज्य सरकारें DA बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पुराने भत्तों को वापस लेना तर्कसंगत नहीं है।

​आंदोलन की चेतावनी: कई संगठनों ने सरकार को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को वापस लेने की मांग की है, अन्यथा उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

​सरकार का पक्ष

​सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग का मानना है कि कई भत्ते अब अप्रासंगिक हो चुके हैं या उनकी समय सीमा समाप्त हो गई है। नियमों के सरलीकरण और बजट प्रबंधन के नाम पर इन भत्तों की समीक्षा की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय नियमों के दायरे में रहकर लिया गया है।

Tags