इंदौर, जिसे हम देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में जानते हैं, वर्तमान में एक नई चुनौती का सामना कर रहा है—नर्मदा जल की सुचारू आपूर्ति। पिछले कुछ समय से शहर के कई क्षेत्रों में पानी के कम दबाव और किल्लत की शिकायतें मिल रही थीं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए इंदौर नगर निगम (IMC) ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है।
नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर शहर के जल वितरण तंत्र को दुरुस्त करने के लिए 8 अपर आयुक्तों और 32 अनुभवी इंजीनियरों की एक विशेष टास्क फोर्स बनाई गई। इस टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में 'डेरा' डाला और उन लीकेज को ढूंढ निकाला जो सालों से शहर का लाखों लीटर पानी बर्बाद कर रहे थे।
फील्ड पर उतरे आला अधिकारी: प्रशासन की सक्रियता
आमतौर पर फाइलों और दफ्तरों तक सीमित रहने वाले आला अधिकारी जब खुद जमीन पर उतरकर फावड़े और मशीनों के साथ खड़े होते हैं, तो काम की गति और गुणवत्ता दोनों बदल जाती है।
रणनीति: शहर को अलग-अलग ज़ोन में बांटा गया।
निरीक्षण: 8 अपर आयुक्तों ने व्यक्तिगत रूप से उन संवेदनशील पॉइंट्स का दौरा किया जहाँ से पानी की बर्बादी की सूचना मिली थी।
तकनीकी टीम: 32 इंजीनियरों की टीम ने फ्लो-मीटर और प्रेशर टेस्टिंग के जरिए लीकेज के सटीक स्थानों को चिन्हित किया।
यह अभियान केवल एक रूटीन चेकअप नहीं था, बल्कि इंदौर के जल वितरण बुनियादी ढांचे का एक 'मेजर ऑपरेशन' था।
15 जगहों पर खुदाई और 7 बड़े लीकेज का खुलासा
नगर निगम की टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर शहर के 15 प्रमुख स्थानों पर खुदाई का काम शुरू किया। यह काम चुनौतीपूर्ण था क्योंकि शहर की व्यस्त सड़कों के नीचे बिछी पाइपलाइनों तक पहुँचना और यातायात को बाधित न होने देना एक बड़ी जिम्मेदारी थी।
खुदाई के दौरान जो नतीजे सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। टीम को 7 बड़े लीकेज मिले, जिनसे प्रतिदिन लाखों गैलन पानी जमीन के अंदर समा रहा था।
लीकेज मिलने के मुख्य क्षेत्र:
नर्मदा मुख्य वाहिनी (Main Pipeline): मुख्य फीडर लाइन में बड़े लीकेज मिले जो जल भंडारण टैंकों तक पहुँचने वाले दबाव को कम कर रहे थे।
जंक्शन पॉइंट्स: पाइपलाइनों के जोड़ों पर पुरानी रबर सील के खराब होने से पानी का रिसाव हो रहा था।
अवैध कनेक्शन के पास डैमेज: कुछ स्थानों पर अवैध कनेक्शन की कोशिश में पाइपलाइन को क्षति पहुंचाई गई थी।
इंजीनियरिंग की चुनौती और समाधान
32 इंजीनियरों की टीम के लिए यह कार्य किसी चुनौती से कम नहीं था। नर्मदा के तीसरे और चौथे चरण की पाइपलाइनें काफी गहराई पर हैं।
"हमें न केवल लीकेज को बंद करना था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि रिपेयरिंग के बाद दबाव बढ़ने पर पाइपलाइन दोबारा न फटे।" - ऑन-साइट इंजीनियर का बयान
इंजीनियरों ने वेल्डिंग की आधुनिक तकनीक और हैवी-ड्यूटी क्लैंप्स का उपयोग किया। कई जगहों पर पाइप के पूरे हिस्से को बदलकर नया 'कॉलर' डाला गया ताकि भविष्य में वहाँ से रिसाव की संभावना शून्य हो जाए।
आम जनता पर प्रभाव और राहत
इन लीकेज के सुधरने से इंदौर के कई वार्डों में पानी की समस्या का तत्काल समाधान होगा।
बेहतर प्रेशर: अब ऊँचाई पर स्थित टंकियों में पानी तेजी से भरेगा।
समय की बचत: पानी की बर्बादी रुकने से जल आपूर्ति का समय भी बढ़ाया जा सकता है।
गंदे पानी से निजात: अक्सर लीकेज वाली जगहों से सीवरेज का पानी पाइपलाइन में मिल जाता था, अब शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल मिलेगा।
नगर निगम की भविष्य की योजना
इंदौर नगर निगम केवल इन 7 लीकेज तक सीमित नहीं रहना चाहता। आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि:
डिजिटल मॉनिटरिंग: अब शहर की पाइपलाइनों में सेंसर लगाए जाएंगे जो दबाव कम होते ही कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेंगे।
नियमित ऑडिट: हर महीने जल वितरण का ऑडिट किया जाएगा।
सख्त कार्रवाई: जो लोग पाइपलाइन के साथ छेड़छाड़ कर अवैध कनेक्शन लेते हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।