शिक्षकों की रियल-टाइम अटेंडेंस मॉनिटरिंग के निर्देश: शिक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही पर CM का जोर

स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश, ई-अटेंडेंस प्रणाली 1 जुलाई 2025 से सभी जिलों में अनिवार्य
 
CM ने शिक्षकों की real-time attendance monitoring के निर्देश दिए: स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा

​राज्य में शिक्षा के स्तर को सुधारने और स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने शिक्षकों की रियल-टाइम अटेंडेंस मॉनिटरिंग करने के लिए एक सख्त प्रणाली लागू करने का आदेश दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़े।

​   ई-अटेंडेंस ऐप: अब नहीं चलेगा 'लेट-लतीफी' का बहाना

​शिक्षा विभाग ने 'हमारे शिक्षक' (Hamare Shikshak) जैसे ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म और ई-अटेंडेंस मोबाइल ऐप के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति को डिजिटल रूप देने की पहल की है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद, इस प्रणाली को और भी कड़ाई से लागू किया जा रहा है।

​सख्त नियम और समयबद्धता

​लाइव लोकेशन अनिवार्य: शिक्षकों को स्कूल परिसर में रहते हुए ही मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी, जिससे उनकी वास्तविक लोकेशन ट्रैक हो सके।

​उपस्थिति का समय: सुबह स्कूल खुलने के एक घंटे के भीतर और स्कूल बंद होने के आधे घंटे बाद तक ही अटेंडेंस दर्ज की जा सकती है।

​कड़ी कार्रवाई: समय पर उपस्थिति दर्ज न करने पर उस दिन को आकस्मिक अवकाश (Casual Leave) के रूप में काट लिया जाएगा। इसका मतलब है कि अब बिना बताए अनुपस्थित रहना संभव नहीं होगा।

​  मॉनिटरिंग और सीएम डैशबोर्ड से इंटीग्रेशन

​शिक्षा विभाग इस पूरी प्रक्रिया को सीएम डैशबोर्ड से इंटीग्रेट कर रहा है। इससे मुख्यमंत्री कार्यालय सीधे स्कूलवार और कक्षावार शिक्षकों और छात्रों दोनों की उपस्थिति का दैनिक डेटा देख सकेगा। अधिकारियों के लिए यह डेटा रिवॉर्ड और एक्शन का आधार बनेगा, जिससे लापरवाह शिक्षकों और संस्था प्रधानों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

​संस्था प्रधानों पर भी सख्ती: मॉनिटरिंग रिपोर्ट में यह संज्ञान में आया है कि कई विद्यालयों में संस्था प्रधान (Principal) स्वयं ई-अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं, जिसके कारण शिक्षक भी लापरवाही बरत रहे हैं। विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को आदेश दिया है कि वे संस्था प्रधानों के लिए ई-अटेंडेंस मॉनिटरिंग की व्यवस्था पोर्टल पर सुनिश्चित करें और आदेश का सख्ती से पालन करवाएं।

​   लक्ष्य: शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन

​सरकार का मानना है कि शिक्षकों की नियमित उपस्थिति शिक्षा की गुणवत्ता का मूल आधार है। इस डिजिटल अटेंडेंस प्रणाली के कई लाभ हैं:

​पारदर्शिता: उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड होने से मनमानी और अनियमितता पर रोक लगेगी।

​जवाबदेही: स्कूलों में अनुशासन और नियमितता बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा।

​सकारात्मक प्रभाव: शिक्षकों की नियमित उपस्थिति से छात्रों की पढ़ाई सुधरेगी और शैक्षिक परिणामों में भी सुधार देखने को मिलेगा।

​यह प्रणाली 1 जुलाई 2025 से राज्य के सभी जिलों में अनिवार्य कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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