मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान में लोकायुक्त पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। ताजा मामला नर्मदापुरम (होशंगाबाद) जिले का है, जहाँ जिला सहकारी बैंक के एक शाखा प्रबंधक (Branch Manager) को लोकायुक्त की टीम ने 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब बैंक मैनेजर एक किसान से उसके लोन की फाइल को आगे बढ़ाने और स्वीकृत कराने के बदले पैसे ले रहा था।
घटना का विवरण: आखिर क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम संभाग के अंतर्गत आने वाले जिला सहकारी बैंक की शाखा में यह भ्रष्टाचार का खेल लंबे समय से चल रहा था। शिकायतकर्ता, जो कि एक स्थानीय किसान है, ने लोकायुक्त विभाग को सूचना दी थी कि उसे खेती-किसानी और व्यक्तिगत कार्यों के लिए बैंक से ऋण (Loan) की आवश्यकता थी।
जब किसान ने बैंक के चक्कर लगाए, तो शाखा प्रबंधक ने उसे सीधे तरीके से मदद करने के बजाय फाइल में कमियां निकालना शुरू कर दिया। अंततः, बैंक मैनेजर ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि वह लोन की राशि जल्दी चाहता है, तो उसे 'कमीशन' के तौर पर रिश्वत देनी होगी।
सौदेबाजी और लोकायुक्त की प्लानिंग
किसान ने पहले तो मिन्नतें कीं, लेकिन जब मैनेजर नहीं माना, तो किसान ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। उसने लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, लोकायुक्त पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया और भ्रष्टाचार के इस खेल को उजागर करने के लिए जाल (Trap) बिछाया।
रंगे हाथों पकड़ाया रिश्वतखोर मैनेजर
योजना के मुताबिक, लोकायुक्त टीम ने किसान को केमिकल (फेनोल्फथैलीन पाउडर) लगे हुए नोट देकर बैंक भेजा। जैसे ही किसान ने बैंक मैनेजर के केबिन में जाकर उसे 20,000 रुपये की रिश्वत सौंपी, बाहर तैनात लोकायुक्त की टीम ने तुरंत धावा बोल दिया।
जब्ती की कार्रवाई: लोकायुक्त की टीम ने बैंक मैनेजर के पास से रिश्वत के पैसे बरामद किए।
वैज्ञानिक साक्ष्य: जब मैनेजर के हाथ धुलवाए गए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो इस बात का पुख्ता सबूत है कि उसने रिश्वत के नोटों को छुआ था।
अफरातफरी का माहौल: अचानक हुई इस छापेमारी से बैंक परिसर में हड़कंप मच गया। अन्य कर्मचारी और वहां मौजूद ग्राहक भी हतप्रभ रह गए।
मध्य प्रदेश में बढ़ता भ्रष्टाचार और लोकायुक्त की सक्रियता
यह पहली बार नहीं है जब एमपी में किसी बैंक अधिकारी को इस तरह पकड़ा गया हो। जिला सहकारी बैंकों का सीधा जुड़ाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों से होता है। ऐसे में इन संस्थानों में भ्रष्टाचार किसानों की कमर तोड़ देता है।
सहकारिता विभाग पर सवाल
इस घटना ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक मैनेजर जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग जब रक्षक की जगह भक्षक बन जाते हैं, तो आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठने लगता है। राज्य सरकार और लोकायुक्त संगठन लगातार चेतावनी दे रहे हैं, फिर भी अधिकारियों के मन में कानून का खौफ कम नजर आ रहा है।
विधिक कार्रवाई और आगामी कदम
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी बैंक प्रबंधक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
दस्तावेजों की जांच: टीम बैंक से संबंधित उन फाइलों को भी खंगाल रही है, जिन्हें मैनेजर ने रोक कर रखा था।
संपत्ति की जांच: आशंका जताई जा रही है कि आरोपी ने पहले भी कई लोगों से इसी तरह पैसे लिए होंगे। लोकायुक्त की टीम आरोपी की आय से अधिक संपत्ति की भी जांच कर सकती है।
विभागीय कार्रवाई: बैंक प्रबंधन को भी इस गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना दे दी गई है, जिसके बाद मैनेजर का निलंबन (Suspension) तय माना जा रहा है।