मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में लोकायुक्त संगठन ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए शहडोल जिले में पदस्थ एक महिला उपयंत्री को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई लोकायुक्त संभाग रीवा की टीम द्वारा की गई, जिसने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया।
मामला क्या है?
यह पूरा मामला नगर परिषद खंड बाणसागर, जिला शहडोल से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता मेसर्स जे.के. अग्रवाल, निवासी पाण्डेन टोला, हुजूर (रीवा) ने 7 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उन्हें नगर परिषद खंड शहडोल में एक खेल मैदान में स्टेयर (सीढ़ी) निर्माण का काम निविदा प्रक्रिया के तहत मिला था।
कार्य पूर्ण होने के बाद अंतिम भुगतान (फाइनल बिल) के लिए मूल्यांकन आवश्यक था, लेकिन संबंधित उपयंत्री द्वारा जानबूझकर मूल्यांकन नहीं किया जा रहा था। आरोप था कि उपयंत्री सुधा वर्मा द्वारा इस काम के मूल्यांकन के लिए 20,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।
शिकायत की जांच और सत्यापन
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त रीवा के पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी सत्यापन प्रक्रिया शुरू कराई गई। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी उपयंत्री द्वारा वास्तव में रिश्वत की मांग की जा रही थी। सत्यापन के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुई बातचीत में रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई।
इसके बाद लोकायुक्त टीम ने पूरी योजना बनाकर ट्रैप कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।
ट्रैप ऑपरेशन कैसे हुआ?
9 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त रीवा की टीम ने एक विशेष ट्रैप ऑपरेशन चलाया। शिकायतकर्ता को तय योजना के तहत 10,000 रुपये की रिश्वत राशि के साथ भेजा गया। जैसे ही आरोपी उपयंत्री सुधा वर्मा ने पैसे स्वीकार किए, मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया।
यह कार्रवाई नगर परिषद कार्यालय, खांड देवलौंद, जिला शहडोल में की गई। पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र शासकीय गवाहों की उपस्थिति में पूरी की गई, जिससे कार्रवाई की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
आरोपी का विवरण
गिरफ्तार की गई आरोपी का नाम सुधा वर्मा है, जिनकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है। वह मूल रूप से ग्राम मड़वास, पोस्ट मड़वास, तहसील मझौली, जिला सीधी की निवासी हैं। वर्तमान में वह नगर परिषद खाड़, जिला शहडोल के शासकीय आवास में रह रही थीं और उपयंत्री के पद पर कार्यरत थीं।
कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(क) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस धारा के तहत रिश्वत लेने और भ्रष्ट आचरण के लिए सख्त सजा का प्रावधान है।
लोकायुक्त टीम द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है, जिसमें आरोपी से पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और अन्य संभावित मामलों की पड़ताल शामिल है।
ट्रैप टीम और अधिकारी
इस सफल कार्रवाई में लोकायुक्त कार्यालय रीवा के निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके साथ टीम में निरीक्षक एस. राम मरावी और उप निरीक्षक आकांक्षा शुक्ला सहित कुल 12 सदस्यीय दल शामिल था। पूरी कार्रवाई स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में की गई, जिससे इसकी वैधता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
लोकायुक्त की सख्ती जारी
मध्य प्रदेश में लोकायुक्त संगठन लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रहा है। सरकारी विभागों में पारदर्शिता लाने और रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने के लिए ऐसी कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत मांगता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आम जनता से अपील
लोकायुक्त संगठन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी भी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी सूचना तुरंत लोकायुक्त कार्यालय को दें। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है—98936 07619।
जनता की सक्रिय भागीदारी से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई को मजबूत किया जा सकता है।