लोकायुक्त रीवा की बड़ी कार्रवाई: हल्का पटवारी 2 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
रीवा। पटवारी ने यह रिश्वत एक जमीन संबंधी मामले में स्थगन आदेश (Stay Order) का प्रतिवेदन (report) तैयार करने के एवज में मांगी थी। यह कार्रवाई लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक गोपाल सिंह धाकड़ के निर्देशन में उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार के नेतृत्व में गठित टीम ने की, जिससे सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, यह मामला मऊगंज या सीधी जिले से जुड़ा है, जो लोकायुक्त रीवा के क्षेत्राधिकार में आता है। शिकायतकर्ता राजेश सिंह (पीड़ित किसान) ने अपनी जमीन से जुड़े एक कानूनी मामले में कोर्ट से स्थगन आदेश प्राप्त किया था। इस आदेश के बाद, हल्का पटवारी को उस स्थगन आदेश के अनुरूप राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री करने और उसका प्रतिवेदन (रिपोर्ट) उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी थी।
आरोपी पटवारी, जिसकी पहचान शिव प्रताप सिंह के रूप में की गई है, ने इस जरूरी सरकारी काम को करने के लिए शिकायतकर्ता राजेश सिंह से रिश्वत की मांग शुरू कर दी। पटवारी ने पहले ₹5,000 की रिश्वत मांगी थी, लेकिन अंततः ₹2,000 की पहली किश्त पर सहमति बनी। इस अवैध मांग से परेशान होकर, पीड़ित राजेश सिंह ने इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक (एसपी) रीवा कार्यालय में दर्ज कराई।
लोकायुक्त का जाल और रंगे हाथों गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले का तत्काल सत्यापन (Verification) किया। सत्यापन में पटवारी द्वारा रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। इसके बाद, उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार के मार्गदर्शन में एक ट्रैप (जाल) टीम का गठन किया गया, जिसमें निरीक्षक जयप्रकाश वर्मा और अन्य सदस्य शामिल थे।
योजना के तहत, शिकायतकर्ता राजेश सिंह को ₹2,000 रिश्वत की राशि लेकर आरोपी पटवारी के पास भेजा गया। लोकायुक्त टीम के सदस्य सिविल ड्रेस में आसपास घात लगाकर बैठ गए। जैसे ही शिकायतकर्ता ने पटवारी शिव प्रताप सिंह को रिश्वत के रासायनिक रंग लगे नोट दिए, पटवारी ने उन्हें अपने हाथ में ले लिया।
रिश्वत की रकम हाथ में आते ही, पहले से ही तैयार लोकायुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर पटवारी को रंगे हाथों दबोच लिया। टीम ने तत्काल आरोपी पटवारी के हाथ धुलवाए, जिसके बाद नोटों पर लगा रंग उसके हाथों पर आ गया। यह वैज्ञानिक रूप से साबित हो गया कि पटवारी ने रिश्वत की राशि स्वीकार की है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद, लोकायुक्त टीम ने आरोपी पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पटवारी को मौके से गिरफ्तार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए लोकायुक्त कार्यालय लाया गया। इस कार्रवाई में लोकायुक्त टीम के सदस्य प्रदीप मिश्रा, टी.आई. मनोज मिश्रा, प्रधान आरक्षक सुरेश कुमार, आरक्षक धर्मेंद्र मिश्रा और अन्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
लोकायुक्त डीएसपी प्रवीण सिंह परिहार ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी सरकारी कर्मचारी को रिश्वतखोरी जैसे कृत्यों में संलिप्त पाए जाने पर बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि जनता के काम में रिश्वत मांगने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के लिए कानून का शिकंजा कसना तय है।
