लोकायुक्त का बड़ा एक्शन: ₹4000 की रिश्वत लेते नायब तहसीलदार रंगे हाथ गिरफ्तार, राजस्व निरीक्षक पर भी शिकंजा
सिंगरौली राजस्व विभाग में हड़कंप! जमीन के कब्ज़े के विवाद में चार साल से लटका था आदेश; 15,000 की रिश्वत मांगने का आरोप.
Thu, 27 Nov 2025
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस का अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में, रीवा लोकायुक्त की टीम ने सिंगरौली जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार (25 नवंबर, 2025) को टीम ने नायब तहसीलदार महेंद्र कुमार कोल को उनके शासकीय आवास पर 4,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में राजस्व निरीक्षक हरी प्रसाद वैश की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिसके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई और जाँच तेज कर दी गई है। इस कार्रवाई से पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
मामले का घटनाक्रम: चार साल से लटका था भू-राजस्व संहिता का आदेश
यह पूरा मामला साल 2016 में जमीन खरीदी से जुड़ा है। करौली (सीधी) के निवासी प्रवीण चतुर्वेदी ने चितरंगी के बालाखण्ड गांव में एक जमीन खरीदी थी। जमीन के कब्जे को लेकर विवाद होने पर, चतुर्वेदी ने 2017 में भू-राजस्व संहिता की धारा 250 के तहत बेदखली के लिए आवेदन दिया था। लंबी प्रक्रिया के बाद, तहसीलदार की अदालत ने 8 सितंबर 2021 को प्रवीण चतुर्वेदी के पक्ष में आदेश जारी कर दिया।
शिकायतकर्ता प्रवीण चतुर्वेदी के अनुसार, आदेश जारी होने के बावजूद नायब तहसीलदार महेंद्र कोल और राजस्व निरीक्षक हरी प्रसाद वैश ने इस पर कार्रवाई को चार साल तक लटकाए रखा। जब फरियादी ने लगातार दबाव बनाया और आदेश का पालन करने की गुहार लगाई, तो दोनों अधिकारियों ने मिलकर उनसे 15,000 रुपये की रिश्वत की मांग कर डाली।
लोकायुक्त ने जाल बिछाया और किया ट्रैप
भ्रष्टाचार से तंग आकर प्रवीण चतुर्वेदी ने रीवा स्थित लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त टीम ने शिकायत का सत्यापन किया। सत्यापन के दौरान, नायब तहसीलदार महेंद्र कोल ने 22 नवंबर को 4,000 रुपये की रिश्वत की मांग की पुष्टि की, जबकि राजस्व निरीक्षक हरी प्रसाद वैश ने भी 23 नवंबर को 8,000 रुपये की मांग की पुष्टि की। शिकायत सही पाए जाने पर, लोकायुक्त दल ने तत्काल कार्रवाई का फैसला लिया और ट्रैप प्लान तैयार किया।
25 नवंबर को, लोकायुक्त दल ने शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम (₹4000) लेकर नायब तहसीलदार महेंद्र कोल के पास बैरीटोला खुर्द स्थित उनके सरकारी आवास पर भेजा। जैसे ही नायब तहसीलदार ने रिश्वत की राशि अपने हाथ में ली, पहले से ही घात लगाए बैठी लोकायुक्त पुलिस की 12 सदस्यीय टीम ने तुरंत छापा मारा और महेंद्र कोल को रंगे हाथ दबोच लिया। उनके हाथों से रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
लोकायुक्त पुलिस उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी महकमे में एक स्पष्ट संदेश दिया है। नायब तहसीलदार महेंद्र कुमार कोल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद नायब तहसीलदार को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
राजस्व निरीक्षक हरी प्रसाद वैश पर भी रिश्वतखोरी में सहयोग करने और रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के कारण अब विभागीय कार्रवाई और कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। लोकायुक्त टीम ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी और भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
यह घटना दर्शाती है कि आम जनता को सरकारी काम कराने के लिए किस तरह से रिश्वतखोरी का सामना करना पड़ता है और कैसे आदेश होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा जानबूझकर देरी की जाती है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से उन नागरिकों को राहत मिली है जो सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार से जूझ रहे हैं। यह मामला मध्य प्रदेश में राजस्व अधिकारियों के बीच फैले भ्रष्टाचार की गहराई को उजागर करता है।
