MP बोर्ड 5वीं-8वीं परीक्षा का नया पैटर्न: अब किताबी ज्ञान के साथ 'संस्कार' भी तय करेंगे रिजल्ट मध्य प्रदेश बोर्ड (MP Board) की 5वीं और 8वीं की परीक्षाओं को लेकर एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया गया है। अब छात्र केवल गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के रट्टे लगाकर अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर सकेंगे। राज्य शिक्षा केंद्र ने स्पष्ट किया है कि अब छात्रों का मूल्यांकन उनकी शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत गुणों, व्यवहार और नैतिक मूल्यों के आधार पर भी किया जाएगा।
क्या है नया परीक्षा पैटर्न?
नए पैटर्न के तहत, अब छात्रों की मार्कशीट में 'ईमानदारी', 'स्वच्छता', 'पर्यावरण संरक्षण' और 'अनुशासन' जैसे विषयों के लिए अलग से ग्रेड दिए जाएंगे। इसे 'समग्र प्रगति कार्ड' (Holistic Progress Card) का नाम दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के भीतर नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करना है ताकि वे एक जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
मूल्यांकन के मुख्य बिंदु
अब शिक्षकों को छात्रों की निम्नलिखित गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखनी होगी:
व्यक्तिगत स्वच्छता: छात्र स्कूल में कितने साफ-सुथरे रहते हैं।
नैतिक मूल्य: ईमानदारी और सच बोलने के प्रति उनका क्या रवैया है।
सहयोग की भावना: साथी छात्रों के प्रति उनका व्यवहार और टीम वर्क।
पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता: पौधों की देखभाल और पानी की बचत जैसे कार्यों में उनकी रुचि।
अंकों का विभाजन और ग्रेडिंग सिस्टम
नई व्यवस्था में शैक्षणिक विषयों का वेटेज तो रहेगा ही, लेकिन 20% से 30% अंक छात्र के व्यक्तिगत आचरण और आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) पर आधारित हो सकते हैं। 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाओं में पास होने के लिए अब इन 'सॉफ्ट स्किल्स' में भी बेहतर ग्रेड लाना अनिवार्य हो सकता है।
इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान शिक्षा पद्धति केवल अंकों की दौड़ बनकर रह गई थी। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के सुझावों को लागू करते हुए, मध्य प्रदेश सरकार चाहती है कि छात्र मानसिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ चारित्रिक रूप से भी मजबूत हों। स्वच्छता और ईमानदारी जैसे गुणों को बचपन से ही प्रोत्साहित करने से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।