MP Board का बड़ा फैसला: परीक्षा केंद्रों पर अब इन शिक्षकों की एंट्री बैन, जारी हुए नए सख्त निर्देश!

MPBSE ने बोर्ड परीक्षा के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब जिन शिक्षकों के बच्चे बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं, उनकी ड्यूटी परीक्षा केंद्रों पर नहीं लगेगी। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

 
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MP Board Exam New Rules: अब शिक्षक नहीं बन पाएंगे केंद्राध्यक्ष! बोर्ड ने परीक्षा नियमों में किया बड़ा बदलाव
​मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) द्वारा आयोजित की जाने वाली 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया गया है। बोर्ड ने परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) को रोकने के लिए ड्यूटी नियमों में संशोधन किया है।
​क्या है नया नियम?
​नए नियमों के अनुसार, ऐसे शिक्षक जिनके खुद के बच्चे या निकट संबंधी इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें परीक्षा केंद्र पर केंद्राध्यक्ष (Center Superintendent) या पर्यवेक्षक (Invigilator) के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा। यह निर्णय निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात या नकल की गुंजाइश न रहे।
​नियमों में सख्ती की मुख्य वजहें
​मध्य प्रदेश बोर्ड पिछले कुछ वर्षों से पेपर लीक की अफवाहों और परीक्षा केंद्रों पर होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सुधार कर रहा है।
​गोपनीयता और निष्पक्षता: यदि किसी शिक्षक का बच्चा उसी केंद्र या उसी जिले में परीक्षा दे रहा है, तो अनजाने में भी सहानुभूति या मदद की संभावना बनी रहती है।
​पारदर्शिता: बोर्ड चाहता है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी हो। बाहरी शिक्षकों की ड्यूटी लगने से स्थानीय प्रभाव कम होता है।
​नकल पर लगाम: केंद्राध्यक्षों पर पूरी परीक्षा की जिम्मेदारी होती है। बोर्ड का मानना है कि इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए शिक्षक का व्यक्तिगत रूप से परीक्षा से जुड़ाव नहीं होना चाहिए।
​शपथ पत्र देना होगा अनिवार्य
​शिक्षकों को ड्यूटी जॉइन करने से पहले एक घोषणा पत्र (Affidavit) देना होगा। इसमें उन्हें स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि उनका कोई बेटा, बेटी या सगा संबंधी इस वर्ष मध्य प्रदेश बोर्ड की हाईस्कूल या हायर सेकेंडरी परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो रहा है। यदि कोई शिक्षक जानकारी छुपाता है और बाद में यह पाया जाता है कि उसका संबंधी परीक्षार्थी था, तो उस शिक्षक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
​कैसे होगी ड्यूटी की तैनाती?
​बोर्ड अब 'रैंडम चयन प्रक्रिया' के जरिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाएगा।
​दूसरे स्कूलों में ड्यूटी: शिक्षकों को उनके मूल स्कूल के बजाय अन्य केंद्रों पर भेजा जाएगा।
​निरीक्षण दल का गठन: उड़नदस्तों (Flying Squads) की संख्या बढ़ाई जा रही है जो औचक निरीक्षण करेंगे।
​डिजिटल मॉनिटरिंग: कई केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए मुख्यालय से निगरानी की जाएगी।
​छात्रों और अभिभावकों पर क्या होगा असर?
​छात्रों के लिए यह खबर अच्छी है क्योंकि इससे मेधावी छात्रों को एक समान और निष्पक्ष माहौल मिलेगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे, चाहे वह शिक्षक हों या छात्र।
​निष्कर्ष
​मध्य प्रदेश बोर्ड का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल बोर्ड की साख बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों में भी यह विश्वास पैदा होगा कि उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन बिना किसी भेदभाव के होगा।

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