MP Cabinet Decision: शहरों के आसपास के इलाकों में चलेंगी सिटी बसें, नए रूट होंगे तय

MP कैबिनेट का बड़ा फैसला! अब गांवों और बाहरी इलाकों तक चलेंगी सिटी बसें। अमृत 2.0 के तहत बदली जाएगी प्रदेश की परिवहन व्यवस्था। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

 
Electric bus
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश की जनता के हित में कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु 'शहरी परिवहन' रहा। सरकार ने अब सिटी बसों का दायरा केवल शहर की सीमाओं तक सीमित न रखकर उन्हें आसपास के ग्रामीण इलाकों और उप-नगरों (Peri-urban areas) तक चलाने का निर्णय लिया है।
​सिटी बसों के लिए तय होंगे नए रूट्स
​अब तक सिटी बसें केवल नगर निगम सीमा के भीतर ही संचालित होती थीं, जिससे शहर के बाहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को निजी वाहनों या महंगे ऑटो-टैक्सी पर निर्भर रहना पड़ता था। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार:
​कनेक्टिविटी विस्तार: अब शहर से 20-30 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों और कस्बों को मुख्य शहर से जोड़ा जाएगा।
​रूट सर्वे: परिवहन विभाग और नगर निगम मिलकर नए रूट्स का निर्धारण करेंगे जहाँ यात्रियों का दबाव अधिक है।
​अमृत 2.0 का सहारा: केंद्र सरकार की 'अमृत 2.0' योजना के तहत इन बसों के संचालन और इंफ्रास्ट्रक्चर (बस स्टॉप, चार्जिंग स्टेशन) का विकास किया जाएगा।
​प्रदूषण मुक्त सफर: इलेक्ट्रिक बसों पर जोर
​सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने पर मुहर लगाई है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि संचालन लागत में भी कमी आएगी। पहले चरण में इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े महानगरों के क्लस्टर्स को प्राथमिकता दी जाएगी।
​आम जनता को क्या होगा फायदा?
​किफायती सफर: निजी बसों और ऑटो की तुलना में सिटी बसों का किराया कम होगा।
​सुरक्षित परिवहन: महिलाओं और छात्रों के लिए शहर के बाहर से मुख्य बाजार या कॉलेज आना सुरक्षित और सुगम होगा।
​रोजगार के अवसर: परिवहन नेटवर्क बढ़ने से ड्राइवरों, कंडक्टर्स और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए नए रोजगार सृजित होंगे।

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