Madhya Pradesh High Court: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि दिवंगत सरकारी कर्मचारी के विवाहित पुत्र को भी 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक फैमिली पेंशन का लाभ मिलता रहेगा। कोर्ट ने माना कि फैमिली पेंशन नियमों में पुत्र के लिए वैवाहिक स्थिति कोई बाधा नहीं है, और केवल विवाह के आधार पर उसे पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता है।
प्रमुख बिंदु और कोर्ट की टिप्पणी
नियम की व्याख्या: न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की एकल पीठ ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 47(6) की व्याख्या करते हुए यह फैसला दिया। इस नियम की उप-धारा (ii) में पुत्र को 25 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक फैमिली पेंशन का पात्र माना गया है।
वैवाहिक स्थिति का मानदंड: कोर्ट ने कहा कि नियम में पुत्र के मामले में यह शर्त नहीं है कि वह अविवाहित हो। विवाहित या अविवाहित होना पुत्र को फैमिली पेंशन देने का मानदंड नहीं है। वहीं, नियम में पुत्री के लिए स्पष्ट रूप से 'अविवाहित' शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसके अनुसार उसे 25 वर्ष की आयु या विवाह होने तक, जो भी पहले हो, पेंशन मिलती है। इस अंतर को देखते हुए, कोर्ट ने पाया कि पुत्र पर विवाह की शर्त लागू नहीं होती है।
याचिका का आधार: दरअसल, एक याचिकाकर्ता को कंपनी (मृत कर्मचारी का विभाग) द्वारा 25 वर्ष की आयु, विवाह, या मृत्यु, जो भी पहले हो, तक फैमिली पेंशन स्वीकृत की गई थी। याचिकाकर्ता ने आदेश में लगाई गई 'विवाह' की शर्त को चुनौती दी थी, क्योंकि वह विवाहित होने के कारण पेंशन से वंचित हो रहा था।
फैसला: कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता विवाहित होने के बावजूद भी 25 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक फैमिली पेंशन का हकदार है। यह अधिकार तब तक जारी रहेगा जब तक वह 25 वर्ष का नहीं हो जाता, या कमाई शुरू नहीं कर देता, या उसकी मृत्यु नहीं हो जाती, जो भी पहले हो। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को बकाया फैमिली पेंशन की राशि का भुगतान किया जाए।
कर्मचारियों और आश्रितों पर प्रभाव
यह निर्णय मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए एक बड़ी राहत है। यह फैसला राज्य में फैमिली पेंशन नियमों के तहत 'पुत्र' की पात्रता को स्पष्ट करता है, और सुनिश्चित करता है कि दिवंगत कर्मचारी के पुत्र को, भले ही उसका विवाह हो गया हो, वित्तीय सहायता जारी रहेगी, जब तक वह कानूनी रूप से निर्धारित आयु सीमा को पार नहीं कर लेता। यह निर्णय हजारों परिवारों को प्रभावित कर सकता है जो अपने आश्रितों के लिए फैमिली पेंशन पर निर्भर हैं।