Prashant Kishor MLA: लालू-नीतीश-पासवान को किया याद, सम्राट चौधरी का जिक्र नहीं

प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली। शपथ के बाद उन्होंने लालू यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और सुशील मोदी समेत कई नेताओं को याद किया, लेकिन सम्राट चौधरी का नाम नहीं लिया।
 
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जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर ने सोमवार को बिहार विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली। शपथ लेने के बाद उन्होंने अपने संबोधन में बिहार की राजनीति के कई बड़े नेताओं को याद किया। खास बात यह रही कि उन्होंने लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी जैसे नेताओं का उल्लेख किया, लेकिन मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम नहीं लिया।
पहली बार विधानसभा के सदस्य बने प्रशांत किशोर
बांकीपुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज करने के बाद प्रशांत किशोर अब औपचारिक रूप से बिहार विधानसभा के सदस्य बन गए हैं। वह जन सुराज पार्टी के विधानसभा में पहले और फिलहाल इकलौते विधायक हैं। उनकी जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बांकीपुर को लंबे समय से भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता रहा है।
शपथ ग्रहण के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार विधानसभा का सदस्य बनना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने उस सदन का जिक्र किया जहां बिहार के कई बड़े नेताओं ने लंबे समय तक काम किया है।
लालू, नीतीश और पासवान का लिया नाम
प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में बिहार की राजनीति के अलग-अलग दौर के नेताओं को याद किया। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर, श्रीकृष्ण सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह, नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव, केदार पांडेय, रामविलास पासवान और सुशील कुमार मोदी जैसे नेताओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने समाज और बिहार की बेहतरी के लिए लंबे समय तक काम किया। ऐसे नेताओं से प्रेरणा लेकर बिहार के लिए काम करने की बात भी उन्होंने कही।
सम्राट चौधरी का नाम नहीं आया
प्रशांत किशोर के बयान में एक राजनीतिक पहलू ने खास तौर पर ध्यान खींचा। उन्होंने बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का जिक्र नहीं किया। यह इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रशांत किशोर हाल के दिनों में बिहार सरकार और मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं।
शपथ से पहले दिए गए एक बयान में प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार के चरित्र में बदलाव की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि पहले चर्चा एनकाउंटर और हाफ एनकाउंटर की होती थी, जबकि अब फैक्ट्री और रोजगार की बात हो रही है। साथ ही उन्होंने नेतृत्व और सरकार में आगे बदलाव की संभावना जताई थी।
रोजगार को बनाया अपना प्रमुख एजेंडा
विधायक बनने के बाद प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के युवाओं और रोजगार को अपने प्रमुख एजेंडे में रखा है। उन्होंने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य भी बताया है।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एक-दो साल में कम से कम 10 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ने की बात कही है। इससे संकेत मिलता है कि विधानसभा में उनकी प्राथमिकता केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि स्थानीय विकास और रोजगार पर भी केंद्रित रहेगी।
भाजपा के गढ़ में जीत ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चा
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट पर भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा को 19 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया। यह जीत इसलिए चर्चा में रही क्योंकि भाजपा ने इस सीट पर उन्हें रोकने के लिए पूरी ताकत लगाई थी।
इस जीत के साथ जन सुराज पार्टी का विधानसभा में खाता खुला और प्रशांत किशोर उसके पहले विधायक बने। इससे बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
शपथ के बाद बोले- काम खुद बोलेगा
विधायक पद की शपथ लेने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि विधानसभा में उन्हें बोलने का मौका मिले या न मिले, लेकिन बांकीपुर में किए गए काम खुद बोलेंगे। उन्होंने विकास कार्यों के जरिए क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों पर भी बेहतर काम करने का दबाव बनाने की बात कही।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जनता से किए गए वादों को पूरा करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। चुनाव के दौरान उन्होंने पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही थी।
बिहार की राजनीति में नई भूमिका
प्रशांत किशोर का विधायक बनना उनके राजनीतिक सफर में एक बड़ा बदलाव है। लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के तौर पर अलग-अलग दलों और नेताओं के साथ काम करने के बाद उन्होंने खुद सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और जन सुराज का गठन किया।
अब विधानसभा में उनके पास सरकार और विपक्ष दोनों के बीच अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने का अवसर है। उनके बयानों से साफ है कि रोजगार, विकास, भ्रष्टाचार और शासन व्यवस्था उनके प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे।
शपथ के दौरान पुराने राजनीतिक दिग्गजों को याद करना और मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम नहीं लेना भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में किसी नेता पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की, बल्कि बिहार के लिए काम करने वाले पूर्व नेताओं से प्रेरणा लेने की बात कही।
आने वाले समय में विधानसभा के भीतर प्रशांत किशोर का रुख बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति कैसा रहता है, यह राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उनकी पहली विधानसभा पारी की शुरुआत रोजगार और विकास के मुद्दों के साथ होती दिखाई दे रही है।

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