मऊगंज में सनसनी: वायरल ऑडियो पर कलेक्टर का कड़ा एक्शन, कार्यपालन यंत्री और उपयंत्री को 'कारण बताओ' नोटिस

​न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने और कलेक्टर पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोपों के कारण हुई कार्रवाई, सात दिन में मांगा गया स्पष्टीकरण।
 
मऊगंज में सनसनी: वायरल ऑडियो पर कलेक्टर का कड़ा एक्शन, कार्यपालन यंत्री और उपयंत्री को 'कारण बताओ' नोटिस

​यह खबर मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से है, जहाँ कलेक्टर संजय कुमार जैन ने प्रशासनिक अनुशासन और न्यायपालिका की गरिमा को भंग करने के आरोप में दो वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध बड़ी और तत्काल कार्रवाई की है। कलेक्टर ने कार्यपालन यंत्री एसबी रावत (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा क्रमांक दो) और उपयंत्री प्रवीण पांडे को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है

यह कार्रवाई मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल हुए एक ऑडियो क्लिप के संबंध में की गई है। इस ऑडियो में कथित तौर पर दोनों अधिकारी न्यायालय द्वारा पारित किसी न्यायालयीन आदेश या कार्यवाही के संबंध में बातचीत कर रहे थे। इस बातचीत के दौरान उन्होंने बिना किसी ठोस आधार के अनुचित, आपत्तिजनक और असम्मानजनक टिप्पणियां कीं, जो सीधे तौर पर न्यायालय की प्रतिष्ठा को धूमिल करने और ठेस पहुंचाने वाली थीं.

​स्थिति की गंभीरता तब और बढ़ गई, जब इस वार्तालाप में अधिकारियों ने जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर पर ही रिश्वत लेकर कार्यवाही बदलने के अत्यंत गंभीर आरोप लगाए। इन आरोपों को प्रमुखता से कुछ समाचार पत्रों में भी प्रकाशित कराया गया.

कलेक्टर संजय कुमार जैन ने इस पूरे मामले को गंभीर आचरण की श्रेणी में रखा है। उन्होंने कहा कि एक सरकारी अधिकारी द्वारा इस प्रकार से न्यायालय की गरिमा को आघात पहुंचाना और न्याय व्यवस्था के प्रति असम-सम्मान प्रदर्शित करना गंभीर कदाचार है। साथ ही, जिला प्रशासन के मुखिया पर ही झूठे और आधारहीन रिश्वत के आरोप लगाना प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस तरह के कृत्य से लोक सेवकों के आचरण नियम (Conduct Rules) का स्पष्ट उल्लंघन होता है.

कलेक्टर ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए कार्यपालन यंत्री और उपयंत्री को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे नोटिस जारी होने के सात दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें.

यह घटना स्पष्ट संदेश देती है कि मऊगंज जिले में किसी भी तरह की प्रशासनिक लापरवाही, प्रशासनिक मुखिया पर निराधार आरोप या न्यायपालिका की अवमानना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि दोनों अधिकारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब देने में असफल रहते हैं, तो उनके विरुद्ध निलंबन सहित सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। यह मामला अब जिले के प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है।

Tags