Silver Price Rise: क्यों बढ़ रहे हैं चांदी के दाम? जानें निवेश के बड़े कारण और एक्सपर्ट की चेतावनी।

2025-26 में चांदी की कीमतों में भारी उछाल के पीछे ज्वेलरी नहीं बल्कि निवेश की मांग है। पढ़ें विशेषज्ञों की राय और भविष्य का मार्केट आउटलुक।
 
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भारतीय सर्राफा बाजार में इन दिनों चांदी की चमक सोने से भी अधिक तेज नजर आ रही है। आमतौर पर माना जाता है कि शादियों के सीजन में ज्वेलरी की मांग या फिर सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में औद्योगिक खपत (Industrial Demand) के कारण कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन 2025 और 2026 का ट्रेंड कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस उछाल के पीछे असली खिलाड़ी 'इन्वेस्टमेंट डिमांड' है।

​1. चांदी की कीमतों में उछाल का वर्तमान परिदृश्य

​पिछले कुछ महीनों में चांदी ने निवेशकों को उम्मीद से कहीं ज्यादा रिटर्न दिया है। जहां सोने की कीमतें एक स्थिर दायरे में रही हैं, वहीं चांदी ने कई मनोवैज्ञानिक स्तरों को पार किया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 की शुरुआत तक चांदी के दाम ₹1,25,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को छूने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

​2. ज्वेलरी और इंडस्ट्रियल डिमांड क्यों पड़ गई पीछे?

​परंपरागत रूप से चांदी की खपत का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी और चांदी के बर्तनों से आता था। हालांकि, बढ़ती कीमतों के कारण रिटेल खरीदार अब 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की स्थिति में हैं। वहीं, औद्योगिक मांग स्थिर है, लेकिन वह कीमतों में इस कदर उछाल लाने के लिए पर्याप्त नहीं है। असली हलचल Paper Silver और Physical Silver Investment के क्षेत्र में देखी जा रही है।

​3. निवेश मांग (Investment Demand) बढ़ने के मुख्य कारण

​चांदी में निवेश बढ़ने के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:

​Silver ETF का बढ़ता क्रेज: म्यूचुअल फंड हाउस द्वारा लॉन्च किए गए सिल्वर ईटीएफ (ETF) में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। अब लोग भौतिक चांदी रखने के बजाय डिजिटल रूप में निवेश कर रहे हैं, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ी है।

​Safe Haven Asset: वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं। चांदी को 'गरीबों का सोना' कहा जाता है, लेकिन अब यह बड़े पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन चुकी है।

​Inventory में कमी: लंदन (LBMA) और न्यूयॉर्क (COMEX) जैसे प्रमुख एक्सचेंजों के गोदामों में चांदी का स्टॉक अपने निचले स्तर पर है। जब सप्लाई कम होती है और निवेशक खरीदारी बढ़ाते हैं, तो कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है।

​4. एक्सपर्ट की चेतावनी: सावधानी भी है जरूरी

​भले ही चांदी की कीमतें बढ़ रही हों, लेकिन बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को आगाह भी किया है। चांदी की प्रकृति बहुत 'Volatile' (अस्थिर) होती है। इसका मतलब है कि जितनी तेजी से यह ऊपर जाती है, गिरावट आने पर उतनी ही तेजी से नीचे भी गिर सकती है।

​विशेषज्ञ सलाह: चांदी में एकमुश्त (Lumpsum) पैसा लगाने के बजाय 'Buy on Dips' की रणनीति अपनाएं। बाजार की मौजूदा ऊंचाई पर भारी निवेश जोखिम भरा हो सकता है।

​5. 2026 के लिए चांदी का आउटलुक

​आने वाले महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों और डॉलर इंडेक्स की चाल चांदी की दिशा तय करेगी। यदि डॉलर कमजोर होता है, तो चांदी में और अधिक निवेश आएगा। तकनीकी चार्ट्स संकेत दे रहे हैं कि 2026 में चांदी नए लाइफ-टाइम हाई बना सकती है।

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