भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन विडंबना यह है कि हमें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अब भी बड़े पैमाने पर दालों का आयात करना पड़ता है। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के सीहोर में एक विशाल किसान सभा को संबोधित करते हुए भारत को दाल उत्पादन में 'आत्मनिर्भर' बनाने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अब केवल वादों पर नहीं, बल्कि 'बीज से बाजार तक' की ठोस रणनीति पर काम कर रही है।
1. विजन: दालों का आयात शून्य करने का लक्ष्य
भारत वर्तमान में अरहर (तुअर), उड़द और मसूर जैसी दालों के लिए मोजाम्बिक, म्यांमार और कनाडा जैसे देशों पर निर्भर है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य 2027 तक दालों के आयात को पूरी तरह समाप्त करना है।
मुख्य बिंदु:
विदेशी मुद्रा की बचत: दालों के आयात पर खर्च होने वाले अरबों रुपये अब भारतीय किसानों की जेब में जाएंगे।
खाद्य सुरक्षा: दलहन में आत्मनिर्भरता से देश की प्रोटीन सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
2. 'बीज से बाजार तक' की रणनीति क्या है?
मंत्री जी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उन्हें केवल खेती करने के लिए नहीं कहेगी, बल्कि हर कदम पर साथ देगी। इस रणनीति के चार मुख्य स्तंभ हैं:
A. उन्नत बीजों की उपलब्धता (Quality Seeds)
उत्पादन बढ़ाने के लिए सबसे जरूरी है उच्च उपज वाले बीज। सरकार ने देशभर में 'बीज केंद्रों' का जाल बिछाने का निर्णय लिया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ऐसी किस्में विकसित कर रहा है जो कम पानी में और कम समय में अधिक पैदावार दें।
B. आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण
सीहोर की सभा में चौहान ने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर वैज्ञानिक खेती अपनानी होगी। इसके लिए कृषि सखियों और किसान मित्रों के माध्यम से जमीन स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
C. MSP पर 100% खरीद की गारंटी
किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह रहती है कि अगर पैदावार ज्यादा हुई तो भाव गिर जाएंगे। शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया कि अरहर, उड़द और मसूर उगाने वाले किसानों की पूरी फसल सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदेगी। इसके लिए पोर्टल पर पंजीकरण की व्यवस्था को और सरल बनाया गया है।
D. भंडारण और प्रसंस्करण (Storage & Processing)
फसल कटने के बाद किसानों को औने-पौने दाम पर फसल न बेचनी पड़े, इसके लिए गाँवों के पास ही गोदाम और कोल्ड स्टोरेज बनाए जा रहे हैं। साथ ही, दाल मिलों (Pulse Mills) को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसान खुद अपनी उपज को प्रोसेस करके बेच सकें।
3. मध्य प्रदेश बनेगा 'दाल का कटोरा'
मध्य प्रदेश पहले से ही सोयाबीन और गेहूं उत्पादन में अग्रणी है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एमपी के किसानों में वह क्षमता है कि वे भारत को दालों के मामले में भी दुनिया का नंबर वन बना सकें। सीहोर जैसे जिलों में मिट्टी की उर्वरता दलहन के लिए बेहद अनुकूल है।
4. किसानों के लिए आर्थिक लाभ का गणित
दालों की खेती में अन्य फसलों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है।
लागत में कमी: दलहन फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे अगली फसल के लिए यूरिया की जरूरत कम हो जाती है।
आय में वृद्धि: MSP की गारंटी और कम लागत के कारण किसानों का शुद्ध लाभ 30% से 40% तक बढ़ सकता है।