एक बार फिर टीपी गुर्दवान का वीडियो हुआ वायरल मनरेगा योजना को बताया बताया फर्जीवाड़ा
श्रमिक बिना मजदूरी ले रहे हैं रूपए,खातों में पैसे आने के बाद हमारे कुछ दलाल मजदूरों के घर जाकर वसूलते हैं पैसा
Thu, 17 Jul 2025

रीवा। निलंबित कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक 1 रीवा टीपी गुर्दवान का एक और सनसनीखेज वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में निलंबित कार्यपालन यंत्री एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के सामने कार्यालय की कुर्सी पर बैठे कह रहे हैं। मनरेगा के मजदूर कहीं भी काम नहीं करते। मनरेगा योजना में मात्र मजदूरों का कोटा पूरा करना होता है। बाद में ठेकेदार और हम लोग मिलकर मजदूरों से उनके खाते में मजदूरी का भेजा गया पैसा वसूलते हैं। इसके बाद एक्टिविस्ट पूछते हैं कि जब मजदूर काम नहीं करते तो उनके खाते में जो पैसे आते हैं। उसकी वसूली कैसे होती है तो गुरुद्वान कहते हैं। कई मामलों में तो वसूली हो नहीं पाती लेकिन कई मामलों में वसूली कर लेते हैं। फिर सवाल उठा कि यह वसूली करता कौन है और कैसे करवाई जाती है तो गुर्दवान ने कहा कि कुछ दलाल किस्म के लोग और ठेकेदार मटेरियल सप्लायर होते हैं जो यह काम करते हैं।
*मनरेगा योजना में मजदूर नहीं, फर्जी हाजिरी-:*
कार्यपालन यंत्री स्तर के वरिष्ठ जिला स्तरीय अधिकारी यदि स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि शासन की मनरेगा योजना पूरी तरह से फर्जी हो चुकी है और सरकारी इंजीनियर के द्वारा ही मजदूरों के हकों में डाका डाला जाता है। उनके खाते में मजदूरी के नाम पर आई हुई शासन की राशि की जबरन वसूली कर ली जाती है। तो ऐसे में सवाल उठता है कि अब इस योजना का होगा क्या?
इस वायरल वीडियो से अब यह प्रश्न उठता है कि क्या मनरेगा योजना इसी प्रकार चलती रहेगी। जिसमें मास्टर रोल तो मजदूरों के भरे जाएंगे लेकिन अधिकारी उनसे मजदूरी के पैसे की वसूली करवाएंगे।
*मजदूरी में डाका की हुई आधिकारिक पुष्टि-:*
बहरहाल निलंबित कार्यपालन यंत्री टीपी गुर्दवान के इस तीसरे वायरल वीडियो ने एक बार पुनः सरकारी सिस्टम की पोल खोल दी है और दिखा दिया है कि सरकारी योजनाओं पर किस प्रकार भ्रष्टाचार व्याप्त है। गुर्दवान के इस वायरल वीडियो से मनरेगा में होने वाला फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। पहले तो मनरेगा मजदूरी को लेकर अक्सर शिकायतें हुआ करती थी लेकिन कार्यपालन यंत्री स्तर के अधिकारी से इसकी पुष्टि होने पर अब यह प्रमाणित भी हो चुका है। तो क्या कार्यपालन यंत्री और उनके इंजीनियर मनरेगा के कार्यों में फर्जी मजदूरों के नाम डाला करते थे जिनके नाम पर मजदूरी होना दिखाया जाता था लेकिन वह मौके पर कार्य नहीं करते थे तो फिर इंजीनियर और सचिव उनकी हाजिरी कैसे भरते थे यह भी सवाल उठता है? बिना उपस्थित मजदूरों के हाजिरी भरा जाना भी एक अपराध है और फिर कार्यपालन यंत्री स्वयं ही स्वीकार कर रहे हैं कि इस प्रकार के मजदूरों से वह उनके मजदूरी के पैसे वसूली करवाते थे।
*अधिकारियों को बताया था घूंसखोर-:*
गौरतलब है कि इसी प्रकार के एक अन्य वायरल वीडियो में निलंबित कार्यपालन यंत्री ने कमिश्नर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को घूसखोर बताया था और कहा था कि गुर्दवान की फर्जी डिग्री वाला मामला दबा दो। आरटीआई से प्राप्त जानकारी बाहर मत करो। यदि शिकायत ऊपर जाएगी तो बड़े अधिकारियों को माल यानी कि पैसा चाहिए। इस प्रकार एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी पर दबाव बनाते हुए निलंबित कार्यपालन यंत्री ने बात की थी जो मोबाइल कैमरे में कैद हो गई थी और वायरल होने के बाद कमिश्नर रीवा संभाग में ईई आरईएस टीपी गुर्दवान को निलंबित कर दिया था।