पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था के लिए एक और बुरी खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान के प्रमुख हवाई अड्डों के प्रबंधन और संचालन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण डील को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है। यह फैसला UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के हालिया भारत दौरे के ठीक बाद आया है, जिसे कूटनीतिक गलियारों में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
क्या थी एयरपोर्ट डील?
पाकिस्तान सरकार अपनी विदेशी मुद्रा भंडार की कमी को पूरा करने और हवाई अड्डों की सेवा गुणवत्ता सुधारने के लिए इस्लामाबाद, कराची और लाहौर जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स का प्रबंधन विदेशी कंपनियों को सौंपना चाहती थी। UAE की कंपनी 'एडी पोर्ट्स ग्रुप' (AD Ports Group) इस डील में सबसे आगे थी। उम्मीद की जा रही थी कि इस निवेश से पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर मिलेंगे, लेकिन अब यह योजना अधर में लटक गई है।
डील रद्द होने के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले के पीछे केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि गहरे कूटनीतिक कारण भी हैं:
भारत के साथ UAE के प्रगाढ़ संबंध: हाल के वर्षों में भारत और UAE के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंची है। प्रधानमंत्री मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच व्यक्तिगत तालमेल ने व्यापारिक रिश्तों को मजबूत किया है।
पाकिस्तान की अस्थिरता: पाकिस्तान में जारी राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं निवेशकों के विश्वास को तोड़ रही हैं।
चीन का प्रभाव: पाकिस्तान की चीन पर बढ़ती निर्भरता से भी खाड़ी देश सतर्क हो गए हैं।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
पाकिस्तान वर्तमान में IMF के बेलआउट पैकेज पर टिका हुआ है। उसे अपनी साख बचाने के लिए मित्र देशों (UAE, सऊदी अरब, कतर) से निवेश की सख्त जरूरत है। UAE के इस पीछे हटने से न केवल आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की "निवेश योग्य देश" की छवि को भी धक्का लगेगा।