वाह रे शिक्षा विभाग! मृत शिक्षकों को भेज दिए नोटिस: 'ई-अटेंडेंस क्यों नहीं लगाई?' कारण बताओ; नहीं तो होगी सख्त कार्रवाई

लापरवाही की हद! ई-अटेंडेंस सिस्टम की तकनीकी त्रुटि का शिकार बने दिवंगत शिक्षक; विभाग की हुई किरकिरी, सुधार का आश्वासन
 
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MP News: प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई ई-अटेंडेंस (E-Attendance) व्यवस्था एक बड़ी लापरवाही के कारण चर्चा का विषय बन गई है। शुरुआत में इस व्यवस्था का विरोध हुआ था, लेकिन अब विभाग द्वारा सख्ती बरती जा रही है, जिसके चलते एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय द्वारा उन शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जिनकी मौत कई महीने पहले हो चुकी है।
​यह मामला मध्य प्रदेश के रीवा और सीधी जैसे जिलों से सामने आया है, जहाँ शिक्षा विभाग के पोर्टल में शिक्षकों के डेटा को अपडेट न करने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। नोटिस में स्पष्ट रूप से दिवंगत शिक्षकों से पूछा गया है कि उन्होंने स्कूल में ई-अटेंडेंस क्यों नहीं लगाई। इतना ही नहीं, नोटिस में उन्हें चेतावनी भी दी गई है कि यदि तीन दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और पूरे प्रदेश में इसकी किरकिरी हो रही है।
​ लापरवाह सिस्टम की चूक
​यह पूरी घटना विभाग के ऑनलाइन रिकॉर्ड और मानव-जनित त्रुटियों का नतीजा मानी जा रही है। शिक्षकों के निधन के बाद भी उनका नाम ई-अटेंडेंस पोर्टल से हटाया नहीं गया था। परिणामस्वरूप, जब पोर्टल ने अटेंडेंस न लगाने वाले शिक्षकों की सूची तैयार की, तो उसमें मृत शिक्षकों के नाम भी शामिल हो गए। बिना क्रॉस-चेक किए अधिकारियों ने सीधे नोटिस जारी कर दिए।
​ अधिकारियों ने दी सफाई
​मामला सामने आने और मीडिया में सुर्खियां बटोरने के बाद, शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस गंभीर चूक को तकनीकी त्रुटि करार दिया है। अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही पोर्टल को अपडेट करेंगे और इस तरह की त्रुटियों को दूर करने के लिए कदम उठाएंगे।
​सीधी जिले से सामने आए ऐसे ही एक मामले में, आज़ाद शिक्षक संघ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। संघ के प्रतिनिधियों ने विभाग से मांग की है कि इस तरह की संवेदनशील चूक दोबारा न हो। उन्होंने बताया कि हाल ही में स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान भी हजारों शिक्षकों को पोर्टल में गलत तरीके से 'अतिशेष' (Surplus) दिखाया गया था। संघ ने जोर देकर कहा है कि शिक्षकों के डेटा को अपडेट करने की प्रक्रिया को सशक्त और त्रुटिरहित बनाया जाना चाहिए।
​ कर्मचारियों के डेटा को लेकर गंभीर सवाल
​यह घटना शिक्षा विभाग में कर्मचारियों के डेटा प्रबंधन की गंभीरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। यह सिर्फ ई-अटेंडेंस का मामला नहीं है, बल्कि इससे यह भी पता चलता है कि विभाग के रिकॉर्ड कितने अप्रचलित हैं। मृत शिक्षकों को नोटिस जारी होने से न केवल उनके परिवारों को मानसिक ठेस पहुंची है, बल्कि सरकारी तंत्र की असंवेदनशीलता भी उजागर हुई है।
​इस घटना से यह स्पष्ट है कि विभाग को न केवल ई-अटेंडेंस सिस्टम को बेहतर बनाने की जरूरत है, बल्कि मानव संसाधन प्रबंधन (HR) से जुड़े अपने सभी रिकॉर्डों को भी तत्काल प्रभाव से अपडेट करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की शर्मनाक और दुखद गलतियाँ न हों। विभाग को जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने बिना किसी जांच के नोटिस पर दस्तखत कर दिए।
​शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस गलती को सुधार लिया जाएगा और भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा।

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