छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए आने वाला समय खुशियों की सौगात लेकर आ सकता है। राज्य की विष्णुदेव साय सरकार ने पेंशनरों की महंगाई राहत (Dearness Relief) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का मन बना लिया है। हालांकि, इस प्रक्रिया में एक तकनीकी और कानूनी अड़चन है—मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000। इसी के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर औपचारिक सहमति मांगी है।
यदि मध्य प्रदेश सरकार इस पर अपनी मुहर लगा देती है, तो राज्य के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री इसकी बड़ी घोषणा कर सकते हैं। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
1. क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ सरकार अपने कर्मचारियों को तो समय-समय पर महंगाई भत्ता (DA) प्रदान कर देती है, लेकिन पेंशनरों के मामले में उसे पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश की अनुमति लेनी पड़ती है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को उनके मूल वेतन पर जो महंगाई राहत मिल रही है, उसे अब 3% और बढ़ाने की योजना है। इस वृद्धि के बाद छत्तीसगढ़ के पेंशनरों की महंगाई राहत केंद्र सरकार के बराबर या उसके काफी करीब पहुंच जाएगी।
2. मध्य प्रदेश से सहमति लेना क्यों जरूरी है?
यह सवाल अक्सर आम जनता के मन में उठता है कि छत्तीसगढ़ एक स्वतंत्र राज्य है, तो उसे MP से पूछने की जरूरत क्यों है? इसका उत्तर मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 में छिपा है।
विभाजन का नियम: जब 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश से अलग हुआ, तब यह तय किया गया था कि अविभाजित मध्य प्रदेश के समय के जो कर्मचारी हैं, उनकी पेंशन का वित्तीय भार दोनों राज्य 74:26 के अनुपात में वहन करेंगे।
सहमति की अनिवार्यता: अधिनियम के अनुसार, पेंशनरों के वित्तीय लाभों (जैसे महंगाई राहत) में किसी भी तरह के बदलाव के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति अनिवार्य है। जब तक भोपाल से 'NOC' (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं मिलता, तब तक रायपुर प्रशासन आधिकारिक तौर पर आदेश जारी नहीं कर पाता।
3. बजट सत्र 2026 और बड़ी घोषणा की उम्मीद
छत्तीसगढ़ का आगामी बजट सत्र इस बार ऐतिहासिक होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग ने इस 3% की वृद्धि के लिए आवश्यक बजट का प्रावधान पहले ही कर लिया है।
चुनावी वादे और सुशासन: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार अपनी 'सुशासन' की छवि को मजबूत करना चाहती है। पेंशनरों का एक बड़ा वर्ग लंबे समय से केंद्र के समान राहत की मांग कर रहा है।
वित्तीय प्रबंधन: राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए, वित्त विभाग ने गणना की है कि 3% की वृद्धि से राज्य के खजाने पर कितना अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसकी तैयारी पूरी हो चुकी है।
4. पेंशनर संगठनों की मांग और दबाव
छत्तीसगढ़ पेंशनर एसोसिएशन पिछले कई महीनों से आंदोलनों और ज्ञापनों के माध्यम से सरकार पर दबाव बना रहा है। उनका तर्क है कि जब महंगाई हर किसी के लिए समान रूप से बढ़ रही है, तो पेंशनरों को उनके हक के लिए महीनों तक दूसरे राज्य की सहमति का इंतजार क्यों करना पड़ता है?
पेंशनर संगठनों की मुख्य मांगें हैं:
धारा 49 को समाप्त किया जाए या उसमें संशोधन हो।
केंद्र के समान तिथि से ही महंगाई राहत का भुगतान किया जाए।
एरियर (Arrears) का भुगतान तुरंत किया जाए।
5. मध्य प्रदेश का रुख क्या रहेगा?
अतीत में देखा गया है कि अक्सर मध्य प्रदेश सरकार अपनी वित्तीय स्थिति का हवाला देकर सहमति देने में देरी करती है। लेकिन वर्तमान में दोनों राज्यों (MP और CG) में एक ही दल की सरकार होने के कारण समन्वय बेहतर रहने की उम्मीद है। यदि मध्य प्रदेश भी अपने पेंशनरों के लिए इसी तरह की वृद्धि की योजना बना रहा है, तो छत्तीसगढ़ को सहमति मिलने में कोई देरी नहीं होगी।
6. इस वृद्धि का पेंशनरों पर प्रभाव (सांख्यिकीय विश्लेषण)
अगर 3% की वृद्धि होती है, तो इसका लाभ राज्य के लगभग 1.5 लाख से अधिक पेंशनरों को मिलेगा।
एक औसत पेंशनर जिसकी बेसिक पेंशन ₹30,000 है, उसे हर महीने ₹900 से ₹1,000 तक का सीधा लाभ होगा।
यह वृद्धि न केवल उनकी क्रय शक्ति को बढ़ाएगी, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाएगी।
7. निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य के बुजुर्गों के प्रति उनके सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है। हालांकि, तकनीकी पेंच अभी भी बरकरार है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और 'डबल इंजन' सरकार के तालमेल से यह उम्मीद जताई जा रही है कि बजट सत्र के दौरान सदन में मुख्यमंत्री की घोषणा पेंशनरों के चेहरे पर मुस्कान ले आएगी।