किसानों को बड़ी राहत! जंगली जानवरों से फसल नुकसान की अब होगी भरपाई, PM फसल बीमा योजना के तहत मिलेगा कवर

​PMFBY में शामिल हुआ 'जंगली जानवरों का हमला', खरीफ 2026 से लागू होंगे नए नियम
 
Pm kisan
PM Kisan Yojana: केंद्र सरकार ने किसानों की एक लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बड़ा ऐलान किया है। अब जंगली जानवरों के हमले से होने वाले फसल नुकसान को भी बीमा कवर के दायरे में लाया जाएगा। इसके अलावा, भारी बारिश या बाढ़ के कारण धान की फसल के जलमग्न होने से हुए नुकसान को भी फिर से इस योजना में शामिल कर लिया गया है।
​कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को इस संबंध में प्रक्रियाओं (Modalities) को औपचारिक रूप से मान्यता दे दी है। यह फैसला खरीफ 2026 (जून-सितंबर) बुवाई सत्र से पूरे देश में लागू होगा।
​ कैसे मिलेगा किसानों को फायदा?
​1. नया ‘ऐड-ऑन कवर’
​जंगली जानवरों के हमले से फसल के नुकसान को अब 'स्थानीयकृत जोखिम' (Localised Risk) श्रेणी में पाँचवें 'ऐड-ऑन कवर' के रूप में मान्यता दी गई है।
​यह फैसला उन किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, जो जंगलों, वन्यजीव गलियारों और पहाड़ी क्षेत्रों के पास रहते हैं और लगातार हाथी, जंगली सूअर, नीलगाय, हिरण और बंदरों जैसे जानवरों के हमलों से नुकसान झेलते हैं।
​2. क्रियान्वयन और रिपोर्टिंग
​राज्यों की भूमिका: राज्यों को उन जंगली जानवरों की सूची अधिसूचित करनी होगी जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही, उन्हें ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर संवेदनशील जिलों या बीमा इकाइयों की पहचान भी करनी होगी।
​नुकसान की रिपोर्टिंग (72 घंटे की समय सीमा): फसल का नुकसान होने पर किसानों को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होगी। यह सूचना 'क्रॉप इंश्योरेंस ऐप' (Crop Insurance App) का उपयोग करके जियोटैग्ड तस्वीरों के साथ अपलोड करनी होगी।
​यह प्रक्रिया PMFBY परिचालन दिशानिर्देशों के अनुरूप है और पूरे देश में वैज्ञानिक, पारदर्शी और व्यावहारिक ढांचे को सुनिश्चित करती है।
​3. धान जलमग्नता (Paddy Inundation) भी शामिल
​इससे पहले, धान जलमग्नता को कुछ तकनीकी कारणों से 2018 में स्थानीय आपदा की श्रेणी से हटा दिया गया था, जिससे बाढ़-प्रवण और तटीय राज्यों के किसानों को बड़ा नुकसान होता था।
​अब इसे फिर से कवर में शामिल करने से मौसमी बाढ़ से प्रभावित किसानों को भी सुरक्षा मिलेगी।
लाखों किसानों को होगा लाभ
​मंत्रालय ने कहा है कि यह महत्वपूर्ण निर्णय राज्यों के लंबे समय से लंबित अनुरोधों पर प्रतिक्रिया है। इस कदम से मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले उच्च जोखिम वाले राज्यों, जैसे ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, उत्तराखंड, और हिमालय तथा उत्तर-पूर्वी राज्यों (असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम) के किसानों को महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है।

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