Crypto Crash News: क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार, ₹72 लाख करोड़ डूबे; बिटकॉइन $65k के नीचे!

सोने-चांदी के बाद अब क्रिप्टो बाजार में बड़ी गिरावट। जानें क्यों डूबे निवेशकों के ₹72 लाख करोड़ और क्या बिटकॉइन की कीमत $10,000 तक गिर जाएगी? 
 
सोने-चांदी

Crypto Market Crash: सोने-चांदी के बाद अब क्रिप्टो में 'ब्लडबाथ', ₹72 लाख करोड़ स्वाहा; क्या शून्य हो जाएगा बिटकॉइन?

​ ग्लोबल वित्तीय बाजारों में हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद अब डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में कोहराम मच गया है। पिछले 24 घंटों के भीतर क्रिप्टो निवेशकों के करीब 72 लाख करोड़ रुपये ($850+ Billion) डूब चुके हैं। बाजार में इस कदर डर का माहौल है कि 'फियर एंड ग्रीड इंडेक्स' (Fear & Greed Index) गिरकर 5 के स्तर पर आ गया है, जो 'अत्यधिक डर' को दर्शाता है।

​क्यों टूटा क्रिप्टो बाजार? 3 मुख्य कारण

​विशेषज्ञों के अनुसार, इस महा-गिरावट के पीछे तीन सबसे बड़े कारण जिम्मेदार हैं:

​अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श (Kevin Warsh) को फेडरल रिजर्व का नया प्रमुख नामित करने की खबरों ने बाजार को डरा दिया है। वॉर्श को 'हॉकिश' (सख्त नीति वाला) माना जाता है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं।

​माइक मैकग्लोन की चेतावनी: ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के रणनीतिकार माइक मैकग्लोन ने भविष्यवाणी की है कि 2026 बिटकॉइन के लिए 2008 जैसा संकट साबित हो सकता है। उनके मुताबिक, बिटकॉइन 90% तक टूटकर $10,000 के स्तर पर जा सकता है।

​लिक्विडिटी क्रंच और पैनिक सेलिंग: अक्टूबर 2025 में $1,24,000 के अपने रिकॉर्ड स्तर को छूने के बाद, बिटकॉइन अब तक अपनी आधी वैल्यू खो चुका है। निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली (Profit Booking) ने बाजार को 'फ्री फॉल' की स्थिति में डाल दिया है।

​बिटकॉइन और ऑल्टकॉइन्स की हालत

​आज सुबह बिटकॉइन $65,000 के आसपास संघर्ष करता नजर आया, जो कुछ ही महीने पहले $1.2 लाख के पार था। एथेरियम (Ethereum), सोलाना (Solana) और अन्य प्रमुख ऑल्टकॉइन्स में भी 15% से 30% तक की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय बाजार में निवेशकों को भारी झटका लगा है क्योंकि एक ही झटके में लाखों करोड़ों की संपत्ति कागजों पर साफ हो गई है।

​क्या अब और टूटेगा बाजार?

​बाजार के जानकारों का कहना है कि जब तक ग्लोबल लिक्विडिटी में सुधार नहीं होता और अमेरिकी ब्याज दरों पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक अस्थिरता बनी रहेगी। हालांकि, रॉबर्ट कियोसाकी जैसे कुछ एक्सपर्ट्स इसे 'खरीदारी का अवसर' भी मान रहे हैं, लेकिन फिलहाल बाजार का ट्रेंड 'बेयरिश' (मंदी की ओर) ही नजर आ रहा है।

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