EPFO Salary Limit Hike: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, क्या अब ₹21,000 होगी बेसिक सैलरी?
11 साल का इंतजार और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
देश के करोड़ों संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत वाली खबर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की मौजूदा ₹15,000 की सैलरी लिमिट की समीक्षा करने और उसे बढ़ाने पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पिछले 11 वर्षों से इस सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि महंगाई और जीवन स्तर में भारी बदलाव आया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को 4 महीने के भीतर इस पर अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि 2014 के बाद से वेतन वृद्धि और मुद्रास्फीति के बावजूद ₹15,000 की सीमा को न बढ़ाना कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
मुख्य बिंदु: "सरकार को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वेतन सीमा को तर्कसंगत बनाना चाहिए।" - सुप्रीम कोर्ट
आखिर क्या है ₹15,000 की सैलरी लिमिट का गणित?
वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹15,000 तक है, तो उसके लिए EPF स्कीम में शामिल होना अनिवार्य है।
मौजूदा योगदान: कर्मचारी और नियोक्ता दोनों ही बेसिक वेतन का 12% हिस्सा PF खाते में जमा करते हैं।
पेंशन का गणित: नियोक्ता के 12% योगदान में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है, लेकिन इसकी गणना अभी भी अधिकतम ₹15,000 की सीमा पर ही की जाती है।
सीमा बढ़ने से कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकार इस सीमा को बढ़ाकर ₹21,000 या ₹25,000 कर सकती है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित होंगे:
ज्यादा बचत: वेतन सीमा बढ़ने से PF खाते में हर महीने ज्यादा पैसा जमा होगा, जिससे रिटायरमेंट फंड बड़ा बनेगा।
पेंशन में भारी इजाफा: EPS योगदान के लिए सैलरी कैप बढ़ने से कर्मचारियों की भविष्य की पेंशन राशि में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।
नए कर्मचारियों को लाभ: वे लोग जिनकी सैलरी ₹15,000 से थोड़ी अधिक होने के कारण अब तक PF के दायरे से बाहर थे, वे भी इस सामाजिक सुरक्षा योजना का हिस्सा बन पाएंगे।