भारत और इजरायल की रक्षा साझेदारी अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जो दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन को पूरी तरह से बदल सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने भारत को अपनी सबसे गुप्त और शक्तिशाली एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) 'गोल्डन होराइजन' (Golden Horizon) देने का एक 'एक्सक्लूसिव' ऑफर दिया है। यह पहली बार है जब इजरायल ने अपनी इस अत्याधुनिक तकनीक के लिए किसी दूसरे देश के साथ हाथ मिलाने की पेशकश की है।
क्या है 'गोल्डन होराइजन' मिसाइल?
'गोल्डन होराइजन' कोई साधारण क्रूज मिसाइल नहीं है। यह एक बैलिस्टिक मिसाइल है जिसे लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। इसे विशेष रूप से सुखोई Su-30MKI जैसे भारी-भरकम फाइटर जेट्स के लिए डिजाइन या संशोधित किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल इजरायल की प्रसिद्ध 'सिल्वर स्पैरो' (Silver Sparrow) मिसाइल प्रणाली का एक उन्नत संस्करण है।
मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं:
रेंज (मारक क्षमता): इसकी अनुमानित रेंज 800 किलोमीटर से लेकर 2,000 किलोमीटर तक हो सकती है।
रफ्तार: इसकी टर्मिनल वेलोसिटी (लक्ष्य से टकराते समय की गति) मैक 5 (हाइपरसोनिक) से अधिक हो सकती है, जो इसे ब्रह्मोस (मैक 2.8) से भी तेज बनाती है।
मिशन: यह मिसाइल विशेष रूप से जमीन के काफी नीचे छिपे परमाणु ठिकानों, भूमिगत कमांड सेंटरों और कंक्रीट के मजबूत बंकरों को तबाह करने के लिए बनाई गई है।
सुखोई Su-30MKI बनेगा और भी घातक
भारतीय वायुसेना के पास 260 से अधिक सुखोई विमान हैं, जो पहले से ही ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस हैं। लेकिन 'गोल्डन होराइजन' के आने से सुखोई की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। यह मिसाइल हवा से दागे जाने के बाद अंतरिक्ष की निचली सतह तक जाती है और वहां से सीधे वर्टिकल (लंबावत) हमला करती है, जिससे किसी भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे चीन का HQ-9 या पाकिस्तान का डिफेंस सिस्टम) के लिए इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है।
ब्रह्मोस से कितनी अलग?
ब्रह्मोस एक क्रूज मिसाइल है जो कम ऊंचाई पर और सीधी रेखा में चलती है। वहीं, 'गोल्डन होराइजन' एक बैलिस्टिक पथ पर चलती है। इसका मतलब है कि यह दुश्मन के रडार की नजर में आने से पहले ही अपनी ऊंचाई और रफ्तार के कारण हमला कर देगी। यह भारत को बिना दुश्मन की वायु सीमा में घुसे, उनके गहरे और संवेदनशील ठिकानों को नष्ट करने की 'स्टैंड-ऑफ' क्षमता प्रदान करती है।
रणनीतिक महत्व: चीन और पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन
यह ऑफर ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा की चर्चाएं तेज हैं। यदि यह सौदा सफल होता है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों (जैसे रूस और चीन) की सूची में शामिल हो जाएगा जिनके पास ऑपरेशनल एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलें हैं।
पाकिस्तान के लिए यह खबर इसलिए चिंताजनक है क्योंकि वह अभी तक भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' और ब्रह्मोस के खौफ से बाहर नहीं निकल पाया है। अब 2,000 किमी की रेंज वाली इस इजरायली मिसाइल के आने से पाकिस्तान का पूरा सैन्य ढांचा भारत की मारक रेंज में होगा।
निष्कर्ष
'गोल्डन होराइजन' का ऑफर इजरायल का भारत पर अटूट विश्वास दर्शाता है। हालांकि, इसकी लागत (लगभग 50 से 100 करोड़ रुपये प्रति यूनिट) और तकनीक के हस्तांतरण पर बातचीत होनी बाकी है, लेकिन यह निश्चित है कि यह मिसाइल भारतीय वायुसेना के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।