तेहरान/यरूशलेम: मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत के बाद जहाँ एक ओर पूरा ईरान शोक में डूबा है और उनकी अंतिम यात्रा (जनाजे) की तैयारियाँ चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर इसराइल ने एक ऐसी चेतावनी दी है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है।
इसराइल ने स्पष्ट कर दिया है कि ख़ामेनेई का उत्तराधिकारी बनने वाला कोई भी नेता उनकी 'हिट लिस्ट' में होगा।
इसराइल की 'Assassination' चेतावनी: "कोई भी उत्तराधिकारी सुरक्षित नहीं"
इसराइली रक्षा मंत्री योव गैलेंट (या तत्कालीन रक्षा नेतृत्व) ने बुधवार को कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के रूप में जिसे भी चुना जाएगा, उसे इसराइल एक वैध सैन्य लक्ष्य (Target) मानेगा।
चेतावनी का सीधा अर्थ: इसराइल का लक्ष्य केवल ख़ामेनेई को हटाना नहीं था, बल्कि वह ईरान के पूरे 'शासन ढांचे' (Regime) को बदलना चाहता है।
उत्तराधिकारी पर नज़र: रिपोर्ट्स के अनुसार, ख़ामेनेई के बेटे मुजतबा ख़ामेनेई का नाम उत्तराधिकारी के तौर पर सबसे ऊपर है। इसराइल की चेतावनी ने मुजतबा और अन्य शीर्ष मौलवियों के लिए सीधे तौर पर जान का खतरा पैदा कर दिया है।
ख़ामेनेई की अंतिम यात्रा: सुरक्षा कारणों से देरी?
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान में बुधवार शाम को होने वाली अंतिम विदाई की रस्म को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
आधिकारिक कारण: शासन का कहना है कि भारी भीड़ और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह निर्णय लिया गया है।
सुरक्षा का डर: हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इसराइल द्वारा तेहरान में लगातार किए जा रहे हवाई हमलों और वरिष्ठ नेतृत्व को निशाना बनाने की धमकी के कारण सुरक्षा एजेंसियां जोखिम नहीं लेना चाहतीं।
युद्ध के 5वें दिन के बड़े घटनाक्रम
पिछले 5 दिनों से जारी इस भीषण संघर्ष (Operation Roaring Lion) ने ईरान की कमर तोड़ दी है:
तेहरान पर ताज़ा हमले: इसराइल ने तेहरान के सुरक्षा कमांड सेंटरों और मिसाइल लॉन्च पैड्स पर 'ब्रॉड वेव' स्ट्राइक की है।
नौसैनिक नुकसान: अमेरिकी सबमरीन ने श्रीलंका के पास ईरान के सबसे महत्वपूर्ण युद्धपोत को डुबोने का दावा किया है।
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स पर हमला: इसराइली सेना ने उस स्थान को भी निशाना बनाया है जहाँ ईरान के नए नेता को चुनने के लिए मौलवियों की बैठक होनी थी।
वैश्विक कूटनीति और भारत पर असर
ईरान ने इस युद्ध को "थपा हुआ युद्ध" (Imposed War) करार दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा ईरान-इसराइल के इस सीधे टकराव से प्रभावित हो रही है।