Putrada Ekadashi significance: कल यानी 30 दिसंबर 2025 (पौष शुक्ल एकादशी) को हिंदू कैलंडर के अनुसार पुत्रदा एकादशी का पवित्र व्रत रखा जाएगा। यह एकादशी विशेष रूप से संतान सुख, परिवार में शांति, और सफलता की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
पूजा की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान के पश्चात् की जानी चाहिए तथा ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। विष्णु जी की पूजा के दौरान शंख में दूध/जल भरकर अभिषेक करना शुभ होता है और यह विधान विशेषतः सौभाग्य एवं संतान की प्राप्ति हेतु अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पूजन के दौरान तुलसी के पत्ते, पीले वस्त्र, फल, फूल, पंचामृत, घी दीपक, धूप–दीप आदि सामग्री का उपयोग आदरणीय माना जाता है। व्रत के दिन अन्न का त्याग कर फलाहार या दूध–दही का सेवन किया जाता है। एकादशी व्रत कथा का पाठ और आरती करने से इसे पूर्ण फल मिलता है।
पुत्रदा एकादशी 2025: संपूर्ण पूजा विधि (Step-by-Step Guide)
30 दिसंबर 2025
शुभ मुहूर्त: सुबह 7:53 बजे तक
पूजा सामग्री
शंख
गंगाजल / स्वच्छ जल
दूध
तुलसी पत्र
पीले फूल
पीले वस्त्र
धूप–दीप
पंचामृत
फल–मिष्ठान
अगरबत्ती
कपूर
पूजा विधि (क्रमवार)
1️⃣ प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
पीले वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान शुद्ध करें।
2️⃣ व्रत का संकल्प लें
हाथ में जल लेकर संकल्प बोलें —
"मैं संतान सुख और परिवार कल्याण हेतु पुत्रदा एकादशी व्रत करता/करती हूँ।"
3️⃣ भगवान विष्णु का आवाहन करें
ध्यान करें और विष्णु जी की मूर्ति/चित्र स्थापित करें।
4️⃣ शंख से अभिषेक करें
शंख में जल या दूध भरकर विष्णु जी का अभिषेक करें।
यह संतान सुख और सौभाग्य वृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
5️⃣ पुष्प, तुलसी और भोग अर्पित करें
6️⃣ मंत्र जाप करें (नीचे दिए गए मंत्र)
7️⃣ एकादशी व्रत कथा पढ़ें
8️⃣ आरती करें और प्रसाद वितरण करें
मुख्य मंत्र
विष्णु मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
नारायण मंत्र:
ॐ नमो नारायणाय
संतान प्राप्ति हेतु मंत्र:
ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते । देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥
व्रत नियम
अन्न का सेवन न करें
फलाहार, दूध, जल ग्रहण करें
क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें