पीएम-आशा योजना के तहत किसानों का पंजीयन शुरू, इस तारीख तक कर सकेंगे आवेदन, जानें Details
PM ASHA Yojana: प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान(पीएम-आशा योजना) के तहत जिले में समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक किया जा रहा है।
Sun, 7 Dec 2025
PM ASHA Yojana: प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) योजना के तहत किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। इस किसान कल्याणकारी योजना के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद के लिए किसानों का पंजीयन शुरू कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, किसान 1 दिसंबर 2025 से लेकर 28 फरवरी 2026 तक आवेदन कर अपना पंजीयन करा सकेंगे। यह योजना किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य सुनिश्चित करने और फसल कटाई के बाद होने वाली संकटपूर्ण बिक्री (distress sale) को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या है पीएम-आशा योजना?
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) भारत सरकार की एक व्यापक अम्ब्रेला योजना है, जिसे सितंबर 2018 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है। यह योजना विशेष रूप से दलहन (Pulses), तिलहन (Oilseeds) और खोपरा (Copra) की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने पर केंद्रित है। हाल ही में, केंद्र सरकार ने इसे वर्ष 2025-26 तक जारी रखने की मंजूरी दी है, जो किसानों की आय सुरक्षा के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
योजना के प्रमुख घटक और लाभ
पीएम-आशा योजना तीन प्रमुख घटकों के माध्यम से किसानों को एमएसपी का लाभ पहुंचाती है:
1. मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme - PSS):
इस घटक के तहत, केंद्र सरकार की नोडल एजेंसियां (जैसे नैफेड और एफसीआई) राज्य सरकारों की मदद से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधे किसानों से दलहन, तिलहन और खोपरा की खरीद करती हैं।
किसानों से अधिसूचित MSP पर फसल खरीदी जाती है और बिक्री के तुरंत बाद भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों (DBT) में कर दिया जाता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है।
2. मूल्य न्यूनता भुगतान योजना (Price Deficiency Payment Scheme - PDPS):
यह घटक मुख्य रूप से तिलहन के लिए है। इसमें, सरकार भौतिक रूप से फसल की खरीद नहीं करती है।
यदि किसान अपनी अधिसूचित फसल को मंडी में एमएसपी से कम कीमत पर बेचता है, तो एमएसपी और बिक्री/मॉडल मूल्य के बीच के अंतर का भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में किया जाता है। इससे किसानों को बाजार मूल्य में गिरावट आने पर भी नुकसान नहीं होता।
3. निजी खरीद और स्टाकिस्ट योजना (Private Procurement & Stockist Scheme - PPPS) का पायलट:
इस योजना के तहत, निजी क्षेत्र को भी खरीद कार्यों में शामिल किया जाता है। राज्यों के पास यह विकल्प होता है कि वे पायलट आधार पर चुनिंदा कृषि उपज मंडी समितियों (APMCs) में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ इस योजना को लागू करें।
किसानों को होने वाले मुख्य लाभ:
एमएसपी की गारंटी: किसानों को उनकी उपज का सही और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होता है।
वित्तीय सुरक्षा: बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव होने पर भी किसानों को नुकसान से बचाया जाता है।
पारदर्शिता: सीधे बैंक खाते में भुगतान होने से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।
फसल विविधीकरण: दलहन और तिलहन पर ध्यान केंद्रित करने से किसान इन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
पंजीयन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
पीएम-आशा योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को पंजीकरण कराना अनिवार्य है। वर्तमान में, कई राज्यों में खरीद के लिए यह प्रक्रिया 1 दिसंबर 2025 से शुरू की जा चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है।
पंजीयन कैसे करें:
किसान अपनी फसल का पंजीकरण राज्य सरकार के संबंधित पोर्टल, नजदीकी कृषि उपज मंडी, या अधिकृत खरीद केंद्रों पर करा सकते हैं।
पंजीकरण के समय, किसानों को अपनी भूमि और फसल की बुआई से संबंधित सही जानकारी देनी होती है।
पंजीयन के बाद, एक विशिष्ट तिथि पर किसान को अपनी उपज लेकर खरीद केंद्र पर उपस्थित होना होता है।
आवश्यक दस्तावेज:
आधार कार्ड
बैंक पासबुक की कॉपी
खेत की जानकारी और स्वामित्व प्रमाण पत्र (जमीन के दस्तावेज)
फसल बुआई प्रमाण पत्र
राशन कार्ड या किसान पहचान पत्र
मोबाइल नंबर
पासपोर्ट साइज फोटो
इस वर्ष किन फसलों की होगी खरीद?
पीएम-आशा योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाने वाली फसलों में मुख्य रूप से खरीफ फसलें शामिल हैं। विभिन्न राज्यों की घोषणाओं के अनुसार, इस अवधि में जिन फसलों का उपार्जन किया जा सकता है, वे हैं:
दलहन: अरहर, मूंग, उड़द
तिलहन: मूंगफली, सोयाबीन
खरीद की सीमा भी प्रति एकड़ तय की गई है। उदाहरण के लिए, कई क्षेत्रों में अरहर, मूंग और उड़द के लिए 3-3 क्विंटल प्रति एकड़, मूंगफली के लिए 7 क्विंटल प्रति एकड़ और सोयाबीन के लिए 5 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से खरीदी की जा रही है। किसान अपनी उपज की निर्धारित मात्रा की खरीद के लिए पंजीकरण करा सकते हैं।
पीएम-आशा योजना किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करती है। सभी पात्र किसानों को अंतिम तिथि 28 फरवरी 2026 से पहले अपना पंजीयन अवश्य करा लेना चाहिए ताकि वे अपनी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित कर सकें और सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ उठा सकें।
