रूसी तेल का 'खेल': अमेरिका की पाबंदियां फेल? भारत की इन कंपनियों ने फिर चौंकाया!

सस्ता तेल या अमेरिकी दोस्ती? भारत ने चुना अपना फायदा; रूसी क्रूड पर लिया बड़ा फैसला।

 
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​रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बाद से ही वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रतिबंधों की नई लहर के बाद भी भारतीय रिफाइनरी कंपनियों, विशेषकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में खासी दिलचस्पी दिखाई है। जहाँ एक ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) जैसी बड़ी निजी कंपनियां सावधानी बरत रही हैं, वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इस मौके का लाभ उठा रही हैं।
​प्रमुख कंपनियों की रणनीति: कौन खरीद रहा है, कौन नहीं?
​रूसी तेल की खरीद को लेकर भारतीय कंपनियों की रणनीति दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है:
​इंडियन ऑयल (IOC) और नायरा एनर्जी की सक्रियता: भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी IOC ने हाल के महीनों में रूस से होने वाली आपूर्ति को न केवल बरकरार रखा है, बल्कि उसे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसी तरह, नायरा एनर्जी, जिसमें रूसी तेल दिग्गज रोसनेफ्ट (Rosneft) की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, लगातार रियायती दरों पर रूसी तेल का आयात कर रही है। इन कंपनियों के लिए रूसी तेल का कम दाम उनके 'ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन' (GRM) को बेहतर बनाने में मदद कर रहा है।
​रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) का सावधानी भरा रुख:
देश की सबसे बड़ी निजी रिफाइनर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वर्तमान में रूसी तेल की अतिरिक्त खरीद से दूरी बनाई हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस के वैश्विक व्यापारिक हित और अमेरिकी वित्तीय प्रणाली के साथ उनके गहरे जुड़ाव के कारण वे किसी भी प्रकार के 'सेकेंडरी प्रतिबंधों' (Secondary Sanctions) का जोखिम नहीं लेना चाहते।
​अमेरिकी प्रतिबंध और भारत का फायदा
​अमेरिका ने हाल ही में उन जहाजों और संस्थाओं पर शिकंजा कसा है जो रूसी तेल को 60 डॉलर प्रति बैरल की 'प्राइस कैप' से ऊपर बेच रहे हैं। इसके बावजूद भारत को फायदा मिलने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
​भारी डिस्काउंट: वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच, रूस अभी भी भारत को आकर्षक छूट पर तेल दे रहा है।
​पेमेंट मैकेनिज्म: भारत और रूस ने डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों (जैसे रुपया-रुबल व्यापार या अन्य मुद्राओं का उपयोग) पर काम किया है, जिससे प्रतिबंधों का असर कम हो गया है।
​ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। सस्ता रूसी तेल घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने और मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने में मदद करता है।

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