हाल ही में सोशल मीडिया पर डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साझा किए गए एक कथित "अमेरिका के नए नक्शे" ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस तस्वीर में ग्रीनलैंड और कनाडा को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है। यह घटना तब और भी अधिक चर्चा का विषय बन गई जब यूरोपीय नेताओं, विशेषकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की प्रतिक्रियाओं को "मूक दर्शक" के रूप में चित्रित किया गया। इस लेख में हम इस विवाद की जड़ें, इसके भू-राजनीतिक प्रभाव और ट्रंप की विस्तारवादी सोच के पीछे के कारणों का विश्लेषण करेंगे।
विवाद की शुरुआत: एक वायरल फोटो और ट्रंप का अंदाज
डोनाल्ड ट्रंप अपनी 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट और आक्रामक विजुअल्स के लिए जाने जाते हैं। वायरल हो रही तस्वीरों में दिखाया गया है कि अमेरिका की सीमाएं अब उत्तर में आर्कटिक तक फैल गई हैं, जिसमें कनाडा का पूरा हिस्सा और डेनमार्क के अधीन आने वाला ग्रीनलैंड शामिल है।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड में दिलचस्पी दिखाई हो। 2019 में अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताई थी, जिसे डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने "बेतुका" (Absurd) करार दिया था। लेकिन इस बार, कनाडा को भी इस नक्शे में शामिल करना एक नए स्तर का कूटनीतिक तनाव पैदा कर रहा है।
कनाडा और अमेरिका के रिश्तों पर असर
कनाडा और अमेरिका के बीच दुनिया की सबसे लंबी साझा सीमा है। दोनों देश व्यापार (USMCA) और सुरक्षा (NORAD) के गहरे साझेदार हैं। ट्रंप द्वारा कनाडा को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में दिखाना न केवल कनाडा की संप्रभुता का अपमान माना जा रहा है, बल्कि यह जस्टिन ट्रूडो की सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
संसाधन और नियंत्रण: कनाडा के पास विशाल प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनमें तेल, प्राकृतिक गैस और ताजे पानी के स्रोत शामिल हैं।
आर्कटिक रूट: जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे नए व्यापारिक मार्ग खुल रहे हैं। ट्रंप का "कनाडा पर कब्जा" वाला नैरेटिव असल में इन भविष्य के व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण की इच्छा को दर्शाता है।
यूरोपीय नेताओं की चुप्पी: मैक्रों और मेलोनी का परिप्रेक्ष्य
रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस नक्शे को देखकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी जैसे कद्दावर नेता भी हैरान रह गए।
इमैनुएल मैक्रों: मैक्रों हमेशा से "यूरोपीय संप्रभुता" के पैरोकार रहे हैं। ट्रंप का यह कदम नाटो (NATO) के भीतर दरार पैदा कर सकता है। अगर अमेरिका अपने पड़ोसी और सहयोगी देशों के प्रति ऐसी मंशा रखता है, तो यूरोप की सुरक्षा गारंटी पर सवाल उठना लाजमी है।
जॉर्जिया मेलोनी: मेलोनी के ट्रंप के साथ अच्छे संबंध माने जाते रहे हैं, लेकिन विस्तारवाद के इस मुद्दे पर उनकी चुप्पी को कूटनीतिक असमंजस के रूप में देखा जा रहा है।
ग्रीनलैंड: ट्रंप का पुराना सपना
ग्रीनलैंड कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अमेरिका की मिसाइल रक्षा प्रणाली (Thule Air Base) के लिए आधार प्रदान करता है। ट्रंप इसे "एक बड़ा रियल एस्टेट सौदा" मानते हैं। उनके समर्थकों का तर्क है कि चीन और रूस जिस तरह से आर्कटिक में अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं, उसे रोकने के लिए ग्रीनलैंड का अमेरिका के पूर्ण नियंत्रण में होना आवश्यक है।
भू-राजनीतिक परिणाम और अंतरराष्ट्रीय कानून
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश की सीमाओं को इस तरह से दोबारा नहीं खींचा जा सकता। संयुक्त राष्ट्र (UN) के चार्टर के अनुसार, किसी भी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना अनिवार्य है। ट्रंप के इस "नक्शे" को दुनिया भर के विशेषज्ञों ने एक 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' (Psychological Warfare) का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका की शक्ति का प्रदर्शन करना है।