US Gulf vs Hormuz: क्या अमेरिका का 'गल्फ कोस्ट' बनेगा भारत के लिए दूसरा मिडिल ईस्ट? जानिए LPG और पेट्रोल संकट का पूरा गणित
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी अस्थिरता ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल और भारी मात्रा में LPG इसी रास्ते से आयात करता है। लेकिन अब खबर आ रही है कि भारत अपनी निर्भरता कम करने के लिए US Gulf (मेक्सिको की खाड़ी) को एक बड़े विकल्प के रूप में देख रहा है।
होर्मुज का संकट और भारत की चिंता
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज के रास्ते होने वाली सप्लाई बार-बार बाधित हो रही है। अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद होता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत हो सकती है। यही कारण है कि भारतीय रिफाइनरीज अब अमेरिकी गल्फ कोस्ट से तेल और गैस के आयात को प्राथमिकता दे रही हैं।
क्यों खास है US Gulf?
बड़ी सप्लाई क्षमता: अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादकों में से एक बन चुका है।
सुरक्षित समुद्री मार्ग: मिडिल ईस्ट के मुकाबले अटलांटिक महासागर का रास्ता युद्ध जैसी स्थितियों से वर्तमान में मुक्त है।
विविधता (Diversification): एक ही क्षेत्र पर निर्भर न रहकर भारत अपनी ऊर्जा टोकरी (Energy Basket) को सुरक्षित करना चाहता है।
हालांकि, US Gulf से आयात करना थोड़ा महंगा और समय लेने वाला (करीब 25-45 दिन) हो सकता है, जबकि मिडिल ईस्ट से टैंकर महज 7-8 दिनों में पहुंच जाते हैं। लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसे भारत का "नया मिडिल ईस्ट" माना जा रहा है।