अमेरिकी रिपोर्ट्स ने पहलगाम अटैक को माना विद्रोही हमला, पाकिस्तान की जीत का किया दावा, चीन ने उठाए सवाल

USCC Report: यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) की 800 पन्नों की रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा: मई में हुए चार दिवसीय भारत-पाकिस्तान संघर्ष में चीन की आधुनिक हथियारों के दम पर पाकिस्तान विजयी रहा; कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रिपोर्ट को 'अस्वीकार्य' बताते हुए सरकार से तत्काल विरोध दर्ज कराने की मांग की।
 
USCC Report
USCC Report on India-Pak Conflict: अमेरिकी कांग्रेस के लिए काम करने वाले एक प्रभावशाली आयोग, यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC), द्वारा हाल ही में जारी की गई 800 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट ने भारत, पाकिस्तान और चीन के भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 20 नवंबर, 2025 को जारी हुई इस रिपोर्ट में कई विवादास्पद और भारत के लिए कूटनीतिक रूप से 'अस्वीकार्य' दावे किए गए हैं, जिसके कारण भारतीय राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है।
​USCC रिपोर्ट के मुख्य विवादास्पद निष्कर्ष
​USCC की यह वार्षिक रिपोर्ट, जो चीन-अमेरिका के आर्थिक और सुरक्षा संबंधों की निगरानी के लिए बनाई गई है, इस बार भारत-पाकिस्तान के एक छोटे संघर्ष को लेकर बेहद गंभीर दावे करती है।
​पाकिस्तान की सैन्य जीत का दावा: रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला और संवेदनशील दावा यह है कि मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय सीमा संघर्ष (Four-day border conflict) में पाकिस्तान विजयी रहा। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने इस जीत के लिए चीन द्वारा प्रदान किए गए अत्याधुनिक हथियारों और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया, जिससे उसे भारत पर सैन्य कामयाबी हासिल हुई।
​चीनी हथियारों का लाइव टेस्ट: USCC ने दावा किया है कि चीन ने इस चार दिवसीय युद्ध को अपने नव-विकसित सैन्य उपकरणों और हथियारों का 'लाइव वॉर टेस्ट' (live war test) करने के एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। युद्ध समाप्त होने के बाद, चीन ने इन हथियारों के प्रदर्शन का वैश्विक स्तर पर प्रचार किया। रिपोर्ट में खास तौर पर चीन के HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, PL-15 मिसाइलों और J-10 फाइटर जेट्स का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इन चीनी हथियारों की मदद से भारत के लड़ाकू विमानों को सफलतापूर्वक गिराया।
​विमान गिराने के दावों में विसंगति: रिपोर्ट में पाकिस्तान के उस दावे का भी उल्लेख है जिसमें उसने 6 भारतीय फाइटर जेट्स, जिनमें राफेल जेट भी शामिल थे, उन्हें मार गिराने की बात कही थी। हालांकि, USCC की रिपोर्ट खुद इस संख्या को पूरी तरह से सत्यापित नहीं करती। इसके अनुसार, इस संघर्ष के दौरान 'सिर्फ 3 भारतीय विमान' गिराए गए। यह संख्या भी भारतीय रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयानों से मेल नहीं खाती और रक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नए सिरे से बहस का विषय बन गई है।
​पहलगाम हमले पर नई शब्दावली: रिपोर्ट का एक और अत्यधिक संवेदनशील दावा पहलगाम (Pahalgam) में हुए हमले से जुड़ा है। जिस हमले को भारतीय सुरक्षा एजेंसियां और सरकार एक 'आतंकवादी हमला' मानती रही हैं, USCC की रिपोर्ट ने उसे 'विद्रोही हमला' (rebel attack) करार दिया है। इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल भारत के आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रुख पर सवाल खड़े करता है, और इसे भारत की संप्रभुता के लिए सीधा खतरा माना जा सकता है।
​USCC रिपोर्ट पर भारतीय विपक्ष का तीखा हमला
​इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद, भारतीय राजनीतिक गलियारों में केंद्र सरकार पर हमला शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को 'भारत के लिए एकदम अस्वीकार्य' बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय से तत्काल इस पर आधिकारिक आपत्ति और कड़ा विरोध दर्ज कराने की मांग की।
​रमेश ने अपने पोस्ट में लिखा, "अब अमेरिकी कांग्रेस के यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी कमीशन की यह रिपोर्ट आई है, जो भारत के लिए एकदम अस्वीकार्य है। क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय इस पर आपत्ति और विरोध दर्ज कराएंगे? हमारी कूटनीति को एक और गंभीर झटका लगा है।" विपक्ष का आरोप है कि सरकार की विदेश नीति की विफलता के कारण ही एक प्रमुख अमेरिकी आयोग इस तरह के दावों को आधिकारिक तौर पर अपनी रिपोर्ट में जगह दे पाया है।
​चीन की प्रतिक्रिया: 'राजनीतिक मकसद से लिखी गई रिपोर्ट'
​अमेरिकी आयोग की इस रिपोर्ट पर चीन ने भी अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। चीन के सरकारी मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह से 'राजनीतिक मकसद' (politically motivated) से लिखी गई रिपोर्ट बताया।
​चीनी अखबार ने अपने लेख में लिखा, "USCC ने एक बार फिर से चीन की आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा क्षेत्र में हो रही तरक्की को इस तरह दिखाया है, जैसे वह दुनिया के लिए खतरा पैदा कर रही हो।" ग्लोबल टाइम्स ने यह भी दावा किया कि इस रिपोर्ट में हकीकत का पूरी निष्पक्षता से विश्लेषण नहीं किया गया है और आयोग के भीतर चीन को लेकर गहरी गलतफहमियां और अहंकार मौजूद है। चीन ने अमेरिका को चीन को और ज्यादा बेहतर तरीके से समझने की नसीहत भी दी है, जिससे रिपोर्ट पर कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
​USCC की भूमिका और रिपोर्ट का महत्व
​यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) एक द्विदलीय (bipartisan) अमेरिकी कमीशन है, जिसका गठन अमेरिकी कांग्रेस द्वारा किया गया है। इसका उद्देश्य चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक और सुरक्षा संबंधों के दीर्घकालिक प्रभावों की जांच करना और अमेरिकी कांग्रेस को सिफारिशें देना है। इस 800 पन्नों की रिपोर्ट में भारत-पाक संघर्ष का उल्लेख चीन की सैन्य-तकनीकी क्षमताओं और उसके वैश्विक प्रभाव को दर्शाने के लिए किया गया है। चूंकि यह अमेरिकी कांग्रेस के लिए तैयार की गई एक आधिकारिक रिपोर्ट है, इसलिए इसके दावों पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया कूटनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
​आगे की कूटनीतिक राह
​USCC की यह रिपोर्ट एक ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर चीन की बढ़ती सैन्य शक्ति और भारत के साथ उसके सीमा विवाद सुर्खियों में हैं। भारत सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह इस रिपोर्ट के दावों, विशेषकर पाकिस्तान की जीत और पहलगाम हमले को लेकर इस्तेमाल की गई शब्दावली पर, आधिकारिक तौर पर कड़ा विरोध दर्ज कराएगी। यह रिपोर्ट न केवल भारत-पाक संबंधों, बल्कि भारत और अमेरिकी कांग्रेस के बीच भी कूटनीतिक संवाद को प्रभावित कर सकती है। आने वाले दिनों में भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और इस पर अमेरिकी प्रशासन का रुख वैश्विक राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।

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