"होर्मुज पर हमारा कंट्रोल!" भारत में ईरान के प्रतिनिधि ने अमेरिका को सुनाई खरी-खरी, बताई रास्ता खोलने की एकमात्र शर्त

भारत में ईरान के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की शर्त बताई है। जानिए क्यों फेल हुई अमेरिका के साथ बातचीत और ट्रंप की नई चेतावनी के क्या हैं मायने।
 
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पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और अमेरिका के सख्त रुख के बीच ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने नई दिल्ली में दिए एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि ईरान ने कभी भी बातचीत की मेज (Negotiating Table) का त्याग नहीं किया है।
​होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का रुख
​दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर डॉ. इलाही ने स्पष्ट किया कि इसे खोलने की जिम्मेदारी केवल ईरान पर नहीं डाली जा सकती। उन्होंने कहा, "हम इसे खोलने के लिए तैयार हैं, लेकिन अभी स्थितियां सामान्य नहीं हैं। वर्तमान में कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन पूर्ण संचालन के लिए क्षेत्र में शांति और विदेशी हस्तक्षेप की समाप्ति आवश्यक है।"
​ईरान ने मांग की है कि यदि दुनिया चाहती है कि होर्मुज का मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रहे, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर युद्ध को रोकने के लिए आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिकी युद्धपोतों की फारस की खाड़ी में मौजूदगी तनाव को कम करने के बजाय उसे भड़का रही है।
​पाकिस्तान में हुई वार्ता क्यों विफल रही?
​हाल ही में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय गुप्त वार्ता हुई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे लेकर कहा कि बातचीत अच्छी रही, लेकिन परमाणु मुद्दे पर सहमति न बन पाने के कारण यह बेनतीजा रही। वहीं, ईरानी सूत्रों का कहना है कि वे "अच्छी भावना" के साथ वार्ता में शामिल हुए थे, लेकिन अमेरिकी पक्ष की ओर से "अधिकतम मांगों" (Maximalist Demands) और बार-बार लक्ष्य बदलने (Shifting Goalposts) के कारण समझौता नहीं हो सका।
​ट्रंप की नाकेबंदी की चेतावनी
​इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी नौसेना उन सभी जहाजों को रोकेगी जो ईरान को 'टोल' चुकाते हैं। ट्रंप प्रशासन ने ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी (Blockade) करने का निर्देश दिया है। इसके जवाब में ईरान की सेना ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि फारस की खाड़ी में सुरक्षा या तो "सबके लिए होगी या किसी के लिए नहीं।"
​भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
​ईरानी प्रतिनिधि के इस बयान का भारत के लिए बहुत महत्व है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। डॉ. इलाही का भारत में यह बयान देना संकेत देता है कि ईरान भारत को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ और मित्र के रूप में देखता है, जो शांति बहाल करने में भूमिका निभा सकता है।

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